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मां - बेटी के बीच दोस्ताना रिश्ता जरूरी

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aprajita 100 miliun smiles - फोटो : amarujala
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अमर उजाला के नारी गरिमा के साझा संकल्प ‘अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल्स’ के तहत अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर शुक्रवार को महिला संवाद का आयोजन हुआ। ‘बेटी बनेगी सहेली’ विषय पर आयोजित संवाद में महिलाओं ने मां-बेटी के रिश्ते को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस रिश्ते के साथ दोस्ती का रिश्ता भी जोड़ा जाना जरूरी है। अगर मां - बेटी एकदूसरे से दोस्त की तरह खुलकर बात करेंगी तो कई समस्या खुद ब खुद निपट जाएंगी।
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ग्वालियर रोड औद्योगिक क्षेत्र स्थित अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद में शामिल महिलाओं ने कहा कि हर बच्चे की पहली गुरु और दोस्त उसकी मां ही होती है। लेकिन, बच्चों के बड़े होने के साथ ये रिश्ते ढीले होते जाते हैं। लेकिन, इन्हें कसकर रखना जरूरी है। बेटी अगर अपनी मां से अपने शारीरिक परिवर्तनों के बारे में चर्चा करेगी, तो मां की सलाह से उसका तनाव दूर हो जाएगा। इसके अलावा घर में या घर के बाहर बेटी के साथ कुछ अच्छा नहीं हो रहा है, तो मां को बताने से समस्या का समाधान हो सकता है।

 

समाज के एक बड़े तबके में अब भी बेटियों के मन में शुरू से ही ये धारणा बना दी जाती है कि वे पराया धन हैं या दूसरे घर की हैं। ये ठीक नहीं है। इससे मां - बेटी के रिश्ते में दूरी आती है। बेहतर होगा कि बेटी की शादी से पहले और बाद में भी मां - बेटी के बीच दोस्ताना ताल्लुकात रहें। वे दोनों आपस में एकदूसरे से घर और बाहर के मामलों में खुलकर चर्चा करें। इससे कई समस्याएं खुद ब खुद निपट जाएंगी।
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- दीपमाला कुशवाहा


‘तन भी उजला, मन भी उजला, इसको तुम कमजोर न समझो, जीवन का सम्मान है नारी’ ये केवल किसी काव्य की पंक्तियां भर नहीं हैं, बल्कि की समाज की हकीकत है। महिला को कमजोर समझना एक भ्रम है। मां-बेटी सभी रूप में महिला सशक्त है। लेकिन, तमाम वर्गों में बेटियों को कमजोर बनाने का काम उनके घर में से ही टोकाटाकी के साथ शुरू होता है। इससे समाज के बाहरी आवरण में भी बेटी अपने को कमजोर समझने लगती है।
- सीमा राजपूत


किशोरावस्था में अचानक होने वाले परिवर्तन को लेकर अक्सर बेटियां घबरा जाती हैं। पहली बार जब माहवारी शुरू होती है, तो इसे वे बीमारी समझने लगती हैं और चिंतित हो जाती हैं। लेकिन, यदि पहले से ही घर में मां द्वारा बेटी को इसकी जानकारी दे दी जाए, तो बेटी घबराएगी नहीं, बल्कि इसके लिए मानसिक रूप से पहले से तैयार रहेगी। इसके लिए जरूरी है कि मां बेटी के बीच दोस्ताना रिश्ता हो।
- अपर्णा दुबे


साल के 365 दिन महिलाओं के होते हैं। बिना महिला के कोई दिन नहीं हो सकता, इसलिए हर दिन महिला दिवस है। महिला व बेटी के बिना हर घर अधूरा है। मां- बाप को बच्चों के साथ दोस्त की तरह रहना चाहिए। समस्या को मिलकर हल करेंगे तो हर चीज आसान हो जाती है। बच्चे भी अब मां बाप से खुल रहे हैं, इससे तालमेल बेहतर हो रहा है।
- दीप्ति राठौर


बेटी ही आगे चलकर पत्नी, बहू और सास बनती है। जो अनुभव जीवन में मिलें, उनको अपनी बेटी से साझा करना चाहिए, ताकि जो मुश्किलें उन्होंने झेलीं आगे बेटी को न उठानी पड़ें। बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। बेटियों को आगे बढ़ना है तो खुद पहले आगे बढ़ना होगा। आत्मविश्वास है तो हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
- विमलेश शर्मा


मां बेटी को दोस्ती का रिश्ता भी जोड़ा जाना जरूरी है। अगर मां - बेटी एक दूसरे से दोस्त की तरह खुलकर बात करेंगी तो कई समस्या खुद ब खुद निपट जाएंगी।  हर बच्चे की पहली गुरु और दोस्त उसकी मां ही होती है। लेकिन, बच्चों के बड़े होने के साथ ये रिश्ते ढीले होते जाते हैं। लेकिन, इन्हें कसकर रखना जरूरी है। मां की सलाह से बेटी का तनाव दूर होता है।
सरोज साहू


स्कूल में लड़कों के साथ छोटे से ही पढ़ाने में आगे चलकर दिक्कत नहीं होती। बेटियां जब उच्च शिक्षा ग्रहण करने या नौकरी करने के लिए दूसरे में शहर में जाती हैं तो उनको लड़कों के साथ पढ़ाई या काम करने में परेशानी नहीं होती। वह सहज होकर काम कर सकती हैं। इसलिए शुरूआत से ही यह भावना नहीं लानी चाहिए कि मेरी बेटी लड़कों के स्कूल में नहीं पढ़ेगी।
- मीता ठाकुर


बहू को भी बेटी की तरह प्यार और समझना चाहिए। इससे घर में संस्कार बढ़ते हैं, जिसके परिणाम हमेशा बेहतर सामने आते हैं। बहू हो या बेटी उसकी आवाज को न दबाएं, उनको साथ लेकर काम करना चाहिए। इससे विपत्ति के वक्त बुरी भावनाएं मन में नहीं आतीं। महिलाओं को यह स्थितियां खुद ही बनानी होंगी। सब के साथ भी समान व्यवहार करना चाहिए।
- उर्मिला पटैरिया


मेरी बेटी नहीं है, लेकिन मैंने मुहल्ले की लड़कियों को अपना दोस्त बना रखा है। वह जो समस्या अपने माता पिता को बताने में संकोच करती हैं वह उन्हें बता देती हैं। मैं एक अच्छे दोस्त की तरह उनको सलाह देकर समस्या को दूर करने में मदद करती हूं। ऐसा सबको करना चाहिए। अपनी बेटी की तरह दूसरों को सलाह देकर भी महिला होने का धर्म निभाया जा सकती है।
- नीता तिवारी


हर रिश्ते को ईमानदारी से निभाना चाहिए। जिस तरह आप बेटी की दोस्त बनती हैं, उसी तरह बहू को भी दोस्त बनना चाहिए। घर में एक होकर रहेंगे तो बाहरी कभी आपके परिवार में हस्तक्षेप नहीं कर सकते। ऐसा माहौल महिलाएं ही बना सकती हैं। मां के संस्कार ही आपको जीवन में आगे ले जाते हैं। पिता का डर होना भी जरूरी है, ताकि बेटियां अपने कर्तव्य को न भूलें।
- पूनम मेहता डे


छोटे से ही बच्चों को गुड और बेड टच के बारे में बताना जरूरी है, ताकि वह दूसरों की गलत मंशा को तुरंत भांप सकें। बेटी अगर अपनी मां से अपने शारीरिक परिवर्तनों के बारे में चर्चा करेगी, तो मां की सलाह से उसका तनाव दूर हो जाएगा। इसके अलावा घर में या घर के बाहर बेटी के साथ कुछ अच्छा नहीं हो रहा है, तो मां को बताने से समस्या का समाधान हो सकता है।
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- भावना मेहरोत्रा।
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