झांसी। परिवहन विभाग द्वारा वाहनों के प्रदूषण की जांच की कंप्यूटराइज्ड व्यवस्था बनाई गई है। लेकिन, यह नई व्यवस्था केवल पेट्रोल वाहनों पर ही सिमट कर रह गई है। डीजल वाहनों के प्रदूषण प्रमाण पत्र पुराने ढर्रे पर ही जारी किए जा रहे हैं।
वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुआं वातावरण के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। इस पर नियंत्रण के लिए परिवहन विभाग द्वारा प्रदूषण जांच केंद्रों को उच्चीकृत किया गया है। इसके तहत जांच केंद्रों द्वारा जारी किए जाने वाले प्रदूषण प्रमाण पत्र पर वाहनों की फोटो व अन्य ब्योरा दर्ज करने का प्रावधान किया गया है।
यह व्यवस्था फर्जी ढंग से जारी किए जाने वाले प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र पर लगाम कसने के लिए की गई है। नगर में संचालित तीन केंद्रों पर पेट्रोल वाहनों की कंप्यूटराइज्ड जांच की भी जाने लगी है, परंतु डीजल वाहनों के प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र पहले की तरह मैन्युअल ही जारी किए जा रहे हैं। जबकि, डीजल वाहनों से प्रदूषण उत्सर्जन का खतरा ज्यादा रहता है।
‘सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी की वजह से डीजल वाहनों के प्रदूषण की कंप्यूटराइज्ड जांच नहीं हो पा रही है। जल्द ही तकनीकी खामी को दूर कर लिया जाएगा। हालांकि, पेट्रोल वाहनों के शत प्रतिशत प्रदूषण प्रमाण पत्र कंप्यूटराइज्ड जारी हो रहे हैं।’
- आर के सिंह, एआरटीओ (प्रशासन)