अपर सत्र न्यायाधीश सुशील कुमार द्वितीय की अदालत ने गैर इरादतन हत्या के मामले में चार आरोपियों को दस - दस साल के कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा एक - एक लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार चिरगांव थाना इलाके के ग्राम करगुवां निवासी अंबिका प्रसाद ने आठ नवंबर 2011 को थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि सात नवंबर को वह परिवार के सदस्यों के साथ खेत पर काम कर रहे थे। इसी दरम्यान गांव के ही महेंद्र सिंह, हरगोविंद, मनोज, प्रदीप और अन्य लोग हाथों में लाठी - डंडे लेकर आए और उन्होंने गाली गलौच करते हुए हमला बोल दिया। घटना में मदन मोहन को गंभीर चोट आई थी, जिसकी महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज में इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया।
अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद उक्त चारों को दस - दस साल की सजा सुनाई। इसके अलावा अन्य धाराओं में भी सजा सुनाईं गईं। जबकि, अन्य आरोपी जमुना प्रसाद, कालीचरण, गुलाब और वैकुंठ को दोषमुक्त करार दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता महेंद्र सिंह ने की।