बरेली में शरीफ आला हजरत के उर्स में शामिल होने के लिए शनिवार सुबह जब जमाल घर से निकले होंगे, तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह सफर उनके परिवार के लिए कभी न भूलने वाला गम बन जाएगा। हर साल ट्रेन से उर्स में जाने वाला परिवार इस बार पहली बार कार से निकला था। पिछले साल ही कार चलाना सीखने वाले मोहम्मद जमाल (50) खुद कार चलाकर परिवार को उर्स में ले जा रहे थे लेकिन बरेली पहुंचने से पहले ही बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण हादसे ने उनकी यह हसरत हमेशा के लिए अधूरी छोड़ दी।
हादसे में उनाव गेट निवासी मोहम्मद जमाल, उनकी बहन शकीला बानो (62), रेहाना (45) और मो. फिरोज (45) की मौत हो गई। जिस परिवार में सुबह उर्स की तैयारियों और सफर की खुशी थी, वहां दोपहर बाद मातम छा गया। झांसी में बैठे परिवार के लोगों को कई घंटे तक हादसे की जानकारी तक नहीं थी। दोपहर बाद जब खबर पहुंची तो घर में चीख-पुकार मच गई। परिवार के अन्य सदस्य भी इटावा के लिए रवाना हो गए।
हर साल ट्रेन से जाते थे, इस बार कार से जाने की जिद
कोतवाली क्षेत्र में ऋषिकुंज विद्यालय के पास गोविंद का बगीचा मोहल्ले में रहने वाले जमाल के परिवार की बरेली के शरीफ आला हजरत में गहरी आस्था थी। परिवार के लोग वहां के पीर को गुरु मानते हैं। उर्स के दिनों में वहां जाने की उनकी वर्षों पुरानी परंपरा थी। साल में चार-पांच बार परिवार बरेली जाता था और हर बार ट्रेन से सफर करता था।
पिछले साल जमाल ने कार चलाना सीखा तो इस बार उनकी इच्छा थी कि परिवार कार से उर्स में जाए। उन्होंने परिवार के लोगों से कार से चलने की बात कही। इस बार उनकी यह इच्छा पूरी भी हुई। नौ लोगों के साथ चलने की सहमति बनी तो दो कारों का इंतजाम किया गया। एक कार में साबिर अपनी पत्नी, भाई और उसकी पत्नी के साथ सवार हुए। दूसरी कार में जमाल, उनकी बहन शकीला, रेहाना, ताहिरा और फिरोज थे। कार जमाल खुद चला रहे थे।
परिवार के सदस्य साबिर ने बताया कि जमाल पहली बार कार चलाकर परिवार को उर्स में ले जा रहे थे। घर से निकलते समय सभी के चेहरों पर उत्साह था। किसी को क्या पता था कि जिस सफर को लेकर इतनी खुशी थी, वह मंजिल तक पहुंचने से पहले ही जिंदगी का सबसे बड़ा दुख बन जाएगा।
पगड़ी के हुनर के लिए दूर तक थी पहचान
हादसे में जान गंवाने वाले मो. फिरोज पगड़ी बनाने के हुनर के लिए पहचाने जाते थे। उनके हाथ से तैयार की गई पगड़ियों की आसपास के इलाकों में भी मांग थी। परिवार के मुताबिक, उर्स में जाने को लेकर फिरोज भी काफी उत्साहित थे।
सुबह घर से निकलते समय किसी को जरा भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही घंटों बाद यह खुशहाल सफर मातम में बदल जाएगा। उर्स की जियारत के लिए निकले परिवार के चार लोगों की मौत की खबर ने घर ही नहीं, मोहल्ले को भी गहरे सदमे में डाल दिया।
डंपर बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर सही लाइन पर चल रहा था
औरैया के अच्छल्दा थाना क्षेत्र में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे में चार की मौत के बाद सीओ बिधूना पी पुनीत मिश्रा मौके पर जांच करने पहुंचे। पुलिस की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि कार में एयरबैग नहीं थे। इसके अलावा उसमें बैठे सभी लोग सीट बेल्ट नहीं लगाए थे, माना जा रहा है कि अगर कार में एयरबैग होता और बैठे लोग सीट बेल्ट लगाए होते तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता। हादसे में यूरो थ्री, 2017 मॉडल की स्विफ्ट डिजायर कार क्षतिग्रस्त है।
हादसे के बाद पुलिस व यूपीडा कर्मचारी घायलों की सुध लेना ही भूल गए। आरोप है कि शनिवार दोपहर 2:17 बजे पुलिस की ओर से वीडियो जारी कर मोहम्मद जमाल व फिरोज के मौत की जानकारी दी गई, जबकि उस समय मोहम्मद जमाल व शकीला बानो की मौत हुई थी। इसके बाद 3:10 पर पुलिस की ओर से अपडेट जारी किया गया। जिसमें मोहम्मद जमाल व शकीला बानो की मौत की पुष्टि की गई और फिरोज को घायल बताया गया।
चौथे की मौत के बाद करीब साढ़े सात बजे मोहम्मद फिरोज की भी मौत हो गई, लेकिन पुलिस की ओर से कोई अपडेट तक नहीं किया गया। हालांकि थानाध्यक्ष ने करीब पौने आठ बजे चौथे मृतक के बारे जानकारी दी। वहीं, करीब आठ बजे बिधूना सीओ पी पुनीत मिश्रा घटनास्थल पर पहुंचे और हादसे के पीछे के कारण की जांच की।
एसपी अभिषेक भारती ने बताया कि हादसे के बाद पुलिस लगातार परिजन के संपर्क में थी। उन्होंने बताया कि जांच में सामने आया है कि हादसे के समय डंपर सही लेन में चल रहा था। कार बाएं तरफ से डंपर में घुसी है। कार सवार एक भी सीट बेल्ट हादसे के समय नहीं लगाए थे।
आई-रेड ऐप में दर्ज होगा हादसे का पूरा तकनीकी विवरण
आई-रेड ऐप में सड़क दुर्घटना से जुड़े हर पहलू का तकनीकी ब्योरा दर्ज किया जाएगा। इसमें शवों की स्थिति, वाहन के पहियों के निशान, वाहन किस दिशा से आया और हादसे के बाद किस दिशा में घूमकर रुका, इसकी जानकारी शामिल होगी। साथ ही वाहन की मीटर रीडिंग, ब्रेक, टायर, स्टीयरिंग समेत पूरे वाहन की तकनीकी जांच की जाएगी।
हेडलाइट और अन्य लाइटों की क्षमता का भी परीक्षण किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत तकनीकी जांच से दुर्घटना के कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण करने और विवेचना को अधिक सटीक व प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।