झांसी। भीषण गर्मी में शुक्रवार की रात झांसी- कानपुर ट्रैक पर दौड़ रही ट्रेनों के यात्रियों के लिए सफर भारी पड़ गया। उरई सेक्शन के भुआ स्टेशन पर कुशीनगर एक्सप्रेस में आई खराबी के कारण ट्रेन को चार इंजन जोड़कर भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका। बाद में जब फाल्ट का पता लगा, तो कमी सामान्य निकली। घटना के कारण पांच घंटे तक उक्त रेल मार्ग का यातायात ठप रहा। मामले के कारण पांच अन्य गाड़ियां भी विलंबित रहीं, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
शुक्रवार की रात रेलवे में अजब घटना देखने को सामने आई। झांसी से गोरखपुर की तरफ जा रही गाड़ी संख्या 11015 डाउन कुशीनगर एक्सप्रेस का रात 11.15 बजे प्रेशर डाउन होने पर ट्रेन उरई से पहले भुआ स्टेशन पर खड़ी हो गई। इससे चालक को लगा कि इंजन में खराब आ गई। इसके बाद कानपुर से झांसी की तरफ आ रही पैसेंजर को उरई स्टेशन पर खड़ा करके उसमें लगे दो इंजनों को मौके पर भेजा गया।
इसके बाद दोनों इंजनों को कुशीनगर एक्सप्रेस से जोड़ दिया गया। मगर, इसके बाद भी ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। बाद में एक मालगाड़ी को लालपुर स्टेशन पर रोककर उसके इंजन को भुआ स्टेशन पर भेजा गया। इस इंजन को भी ट्रेन से जोड़ दिया गया। अब ट्रेन में लगने वाले इंजनों की संख्या चार हो गई थी, मगर इसके बाद भी ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। परेशान चालक व गार्ड ने फाल्ट की तलाश शुरू की तो पता चला कि इंजन के पीछे लगेजवान में लगा एक लोहे का पाइप टूटने से गाड़ी का प्रेशर नहीं बन पा रहा है।
बाद में पाइप की मरम्मत कर रात 3.45 बजे ट्रेन को आगे बढ़ाकर उरई स्टेशन तक लाया गया। इसके बाद ट्रेन से तीन इंजन अलग कर दिए गए। दो इंजन पैसेंजर व एक मालगाड़ी में वापस लगा दिए गए। इंजनों को अलग करने में लगे समय के कारण उक्त ट्रेन सुबह 4.40 बजे गंतव्य के लिए रवाना हो सकी।
उक्त मामले के कारण गाड़ी संख्या 12533 डाउन पुष्पक एक्सप्रेस, 19314 अप इंदौर पटना एक्सप्रेस, 19168 अप साबरमती एक्सप्रेस, कानपुर झांसी पैसेंजर समेत पांच सवारी गाड़ियां विलंबित रहीं। इससे उनमें सवार यात्रियों परेशानी का सामना करना पड़ा।
कर्मचारियों में दिखी समन्वय की कमी
रेल मंत्री की मंशा के अनुरूप रेलवे का पूरा अमला ट्रेनों के समय पालन पर विशेष ध्यान दे रहा है। मगर, कुशीनगर एक्सप्रेस में जिस तरह की कमी के कारण यातायात पांच घंटे तक ठप रहा, इसमें साफ तौर पर कर्मचारियों में समन्वय की कमी सामने आई है।
ट्रेन चालक व गार्ड सीधे मंडल नियंत्रण कार्यालय से जुड़े रहते हैं। अगर मंडल नियंत्रण कार्यालय में बैठे कर्मी सही दिशा निर्देश देकर समन्वय बनाते तो शायद फाल्ट का पता शीघ्र ही लग जाता। भविष्य में ऐसी कर्मियों को सुधारने की सख्त आवश्यकता है।