फर्जी दस्तावेज तैयार कर ललितपुर जेल से बंदी की रिहाई कराने के एक मामले में तत्कालीन जेल अधीक्षक मुखराम को ललितपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को गृह जनपद आजमगढ़ के ग्राम सलारपुर स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया। उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया।
झांसी में वर्ष 1980 में हुई लूट और हत्या के जुर्म में मध्य प्रदेश के जिला अशोक नगर अंतर्गत कस्बा पिपरई निवासी बशीर खां को न्यायालय ने वर्ष 1983 में सजा सुनाई थी। उसे जिला कारागार ललितपुर में निरुद्ध किया गया था। इस मामले में उच्च न्यायालय में अपील दायर की गई थी।
इसके बाद बशीर को सात दिसंबर 1987 को रिहा कर दिया गया। उधर, उच्च न्यायालय में की गई अपील के दौरान हुई सुनवाई में कैदी की रिहाई की जानकारी दी गई। चूंकि, हाईकोर्ट ने इस संबंध में कोई आदेश नहीं दिया था। किसी सक्षम अधिकारी ने जमानत भी नहीं ली थी। इस पर उच्च न्यायालय ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए।
21 मार्च 2018 को उच्च न्यायालय के आदेश पर जिला जज झांसी, झांसी पुलिस और उपमहानिरीक्षक कानपुर परिक्षेत्र द्वारा की गई जांच में यह खुलासा हुआ कि दोष सिद्ध कैदी बशीर खां न तो जनपद न्यायालय द्वारा जमानत पर रिहा किया गया और न ही उत्तर प्रदेश शासन के किसी वैध आदेश के अंतर्गत उसकी रिहाई के आदेश दिए गए। पता चला कि कैदी की रिहाई फर्जी व कूटरचित आदेश के आधार पर की गई थी।
दोष सिद्ध कैदी बशीर, तत्कालीन कारागार अधिकारी व कर्मचारी की संदिग्ध भूमिका स्पष्ट होने पर जेल अधीक्षक बीके मिश्रा की तहरीर के आधार पर कोतवाली पुलिस ने नौ मार्च 2019 को तत्कालीन जेल अधीक्षक, कर्मचारी व सजायाफ्ता कैदी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। तब से पूर्व जेल अधीक्षक वांछित चल रहा था।
कोतवाली पुलिस के विवेचक एसआई सुजीत कुमार मिश्र की टीम ने तत्कालीन जेल अधीक्षक जिला आजमगढ़ के थाना सलारपुर निवासी मुखराम पुत्र अर्जुन सिंह यादव को उनके आजमगढ़ स्थित आवास से गिरफ्तार कर लिया है। चिकित्सीय परीक्षण के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।