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बिना वैज्ञानिक और एक्सपर्ट के कैसे पहुंचेंगे बदमाशों तक पुलिस के हाथ

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झांसी। अपराध के बाद अपराधियों तक पहुंचने और उन्हें सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाली फील्ड यूनिट का जिले में बुरा हाल है। चार साल से इस यूूनिट में न वैज्ञानिक हैं और न ही एक्सपर्ट। सिर्फ एक सिपाही व चालक के सहारे इस यूनिट को चलाया जा रहा है। बड़ी घटनाओं में इस टीम को ले तो जाया जा रहा है, लेकिन यह कारगर साबित नहीं हो पा रही है। ऐसी में कई बड़ी घटनाएं अब भी अनसुलझी पड़ी हैँ।
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फील्ड यूनिट यानी फोरेंसिक टीम अपराध होने पर घटनास्थल की बारीकी से जांच करके सुबूत इकट्ठा करती है। यूनिट में एक्सपर्ट वैज्ञानिक होते हैं। यह लोग अपराध होने के बाद मौके पर पहुंचकर अपराधियों के फिंगर, फुट प्रिंट उठाते हैं। टीम में शामिल वैज्ञानिक घटनास्थल पर पहुंचकर आसानी से समझ जाते हैं कि घटना सच है या नहीं। वह टीम को बताते हैं कि मौके से क्या-क्या सैंपल लेने हैं। जैसे ब्लड सैंपल लेना, किसी की लार या थूक मौके पर है, उसे कैसे एकत्रित करना है। फिंगर प्रिंट, बाल, गोली लगने पर बैलस्टिक रिपोर्ट व अन्य तरह से सैंपल एकत्रित करना होता है। वैज्ञानिक जांच कर मौके से ही बता सकता है कि गोली लगी है कि नहीं। एकत्र किए गए फिंगर व फुट प्रिंट पुलिस रिकार्ड में मौजूद बदमाशों के फिंगर प्रिंट से मिलान किए जाते हैं। इससे आसानी से पुराने बदमाश अपराध करने पर पकड़ में आ जाते हैं। लेकिन जिले की फील्ड यूनिट का हाल बेहाल है। यहां केवल सिपाही व चालक के सहारे ही यूनिट को चलाया जा रहा है। ऐसे में बिना वैज्ञानिक व एक्सपर्ट टीम के जिले की फील्ड यूनिट मौके-ए-वारदात से सुराग ढूंढने में पूरी तरह सफल नहीं हो रही है। पिछले चार साल में टीम ने 600 से अधिक घटनाओं की मौके पर पहुंचकर जांच की है। अधिकांश की रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी गई है। लेकिन कुछेक मामलों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश में इस यूनिट का कम ही सहयोग पुलिस को मिल सका है।
फील्ड यूनिट टीम में रहते हैं इतने लोग
जिले की फील्ड यूनिट टीम कम से कम छह लोगों की होती है। इनमें मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी, प्रयोगशाला अधिकारी, प्रयोगशाला सहायक, दो अन्य सहायक व कैमरापरसन होते हैं।
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फील्ड यूनिट में लिए जाते हैं यह नमूने
- घटना स्थल पर मौजूद रहने वालों के फुट प्रिंट
- घटना स्थल पर बिखरे ब्लड का सैंपल
- रेप के केस में ब्लड या स्पर्म का सैंपल
- घटना स्थल पर मौजूद किसी तरह का तरल पदार्थ
- घटना स्थल पर मौजूद गन पाउडर, बुलेट या खोखे का सैंपल
- घटना स्थल पर मौजूद घटना में प्रयुक्त किसी भी सामान का सैंपल
साक्ष्य की कमी का बदमाश उठा रहे फायदा
नाम न छापने की तर्ज पर एक एक्सपर्ट ने बताया कि अगर पुलिस घटना के समय लिए गए फिंगर प्रिंट या एक्सपर्ट द्वारा लिए गए अन्य नमूनों का मिलान कर कोर्ट में पेश करे तो यह आरोपी को सजा दिलाने के लिए पर्याप्त होगा। लेकिन, आम तौर पर पुलिस सिर्फ बड़ी चोरी या हत्या की वारदात के अलावा अन्य किसी भी घटना के समय एक्सपर्ट की मदद नहीं लेती।
केस नंबर 1
12 जनवरी 2019 को थाना टोड़ीफतेहपुर के रेवन गांव में रहने वाले सराफा कारोबारी सुनील के घर में बदमाशों ने डकैती डाली थी। विरोध करने पर सराफा कारोबारी सुनील व उनके पुत्र आकाश को गोली मार दी थी। लूटपाट कर बदमाश भाग निकले थे। पुलिस के साथ फील्ड यूनिट भी मौके पर गई थी। डेढ़ साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी अब तक न तो बदमाश पकड़े जा सके और न ही घटना का खुलासा हो सका।
केस नंबर 2
10 मई 2019 को पुलिया नंबर नौ रेलवे क्रॉसिंग के पास संदिग्ध हालात में एक युवक व युवती के शव मिले थे। पटरियों के समीप झाड़ियों में बैग, चादर, पानी की बोतलें भी मिली थीं। यहां भी फील्ड यूनिट ने पहुंचकर सुबूत एकत्रित किए थे। इस घटना को करीब सवा साल बीतने को है, लेकिन अब तक दोनों की शिनाख्त कराने में भी पुलिस कामयाब नहीं हो सकी।
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फील्ड यूनिट टीम में एक्सपर्ट की कमी को दूर करने के लिए पत्राचार किया गया है। जल्द ही वैज्ञानिक व एक्सपर्ट मिलते ही समस्या दूर होगी।
दिनेश कुमार पी, एसएसपी
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