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खेतों को जानवरों से चरवाने को मजबूर किसान

Mon, 12 Sep 2016 01:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/झांसी
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खेतों को जानवरों से चरवाने को मजबूर किसान - फोटो : amar ujala
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झांसी। इस बार हुई ज्यादा बारिश से बुंदेलखंड में कम पानी में पैदा होने वाली फसलें बुरी तरह से प्रभावित हो गई हैं। हालात यह हैं कि किसान खेतों में खड़ी खराब फसलों को काटने तक की जहमत तक नहीं उठा रहे हैं। खेत जानवरों से चरवाए जा रहे हैं। इसकी बानगी नगर से सटे गढ़मऊ ग्राम में देखी जा सकती है।
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बुंदेलखंड का किसान कुदरत के कोप का शिकार है। आपदाएं किसानों का साथ नहीं छोड़ रही हैं। पिछले तीन सालों से सूखा जहां कहर बरपा रहा है, तो वहीं बारिश भी आफत बनकर बरसी है। फरवरी 2015 में अतिवृष्टि /ओलावृष्टि से जिले में रबी की फसल बर्बाद हो गई थी। जबकि, पिछली फसल सूखा साफ कर गया। हालात यह रहे कि मिट्टी में नहीं न होने वजह से पचासी फीसदी खेतों में बुवाई भी नहीं हुई। बावजूद, अन्नदाताओं ने हिम्मत नहीं हारी।

इस बार खरीफ में कम पानी में पैदा होने वाली उर्द, तिली व मूंग की अच्छी बुवाई की, लेकिन यहां भी किसान धोखा खा गए। अच्छी बारिश की वजह से यह फसलें बर्बाद हो गईं। फसलों पर पीला मोजिक रोग ने भी खूब कहर ढाया। स्थिति यह है कि किसान अब अपने खेत जानवरों से चरवा रहे हैं। फसलों की कटाई भी उन्हें घाटे का सौदा लग रहा है।
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दो-चार हजार भी हाथ आना मुश्किल
गढ़मऊ के किसान संतोष भार्गव ने बताया कि उन्होंने अपने 12 बीघा के खेत में उर्दू, मूंग व तिली की बुवाई थी। अच्छी फसल की उम्मीद थी। दो लाख रुपये के मुनाफे का अनुमान लगाया था। लेकिन, ज्यादा बारिश ने फसल चौपट कर दी। लागत भी नहीं निकल पा रही है। दो-चार हजार रुपये ही हाथ में आ जाएं तो बहुत है। ऐसे में फसल जानवरों से चरवा कर खेत साफ करा रहे हैं।

22 कुंतल में 22 किलो भी नहीं मिली
गढ़मऊ के किसान चंद्रभान ने बताया कि उन्होंने अपने तीस बीघा के खेत में मूंग, उर्द व तिली की बुवाई की थी। मूंग 30 किलो बाई थी। अच्छी फसल होने पर 22 कुंतल मिलने का अनुमान था, लेकिन ज्यादा बारिश ने सब चौपट कर दिया। 22 किलो मूंग मिलने की भी उम्मीद नहीं है। खराब फसल काटकर बेकार पसीना बहाने से अच्छा है कि खेत जानवरों से ही चरवा दिए जाएं।

यह है बर्बादी का आलम
फरवरी 2015 में अचानक हुई मूसलाधार बारिश से जिले में रबी की फसलों में तीन 3.57 अरब रुपये की क्षति हुई थी। इसके बाद सूखा पड़ने की वजह से जिले के पचास फीसदी खेतों में बुवाई भी नहीं हो पाई थी। गेहूं 45.06 प्रतिशत तथा राई /सरसों की 43.98 प्रतिशत बुवाई ही हो पाई थी। तेज धूप की वजह से बोई गई फसलों में भी पैदावार अच्छी नहीं हुई थी। जबकि, इस बार ज्यादा बारिश ने खरीफ को भारी नुकसान पहुंचाया है।
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