झांसी। रानी की झांसी भाईचारे का पैगाम देती है। यहां भाईचारे की डोर हमेशा ही मजबूत रही है। झांसी में कई लोग ऐसे हैं जो सांप्रदायिक सौहार्द और अमन को कायम रखने का बीड़ा उठाए हैं। इनके कामों को देखकर मशहूर कवि व शायर गोपालदास नीरज की गजल का यह शेर ‘अब तो मजहब कोई ऐसा चलाया जाए, जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए’, आज भी मौजू लगता है। यहां ऐसी अनगिनत मिसालें हैं जो हिंदू-मुस्लिम एकता की मशाल जलाए हुए हैं। कहा जाता है कि यह शहर है अमन का यहां की फिजा निराली... है।
शहर में किले के पास ही हजरत इंसाफ शाह बाबा की दरगाह है। इस दरगाह की खासियत है कि यहां पर उनके मानने वाले जितने मुस्लिम हैं उतने ही हिंदू भी हैं। दोनों कौम के लोग बाबा की दरगाह पर हाजिरी लगाते हैं। इतना ही नहीं बाबा की जिंदगी से मुरीद मलखान दाऊ एक लंबे समय से बाबा की सेवा कर रहे हैं। दरगाह पर उर्स से लेकर इफ्तार तक के सारे इंतजाम मलखान दाऊ ही करते हैं।
मलखान दाऊ ने बताया कि किले के पास ही एक कुटिया में बाबा रहते थे। चालीस साल पहले हम उनके संपर्क में आए। बाबा के पास दूरदराज से उनके तमाम मुरीद आते थे। लोग अपनी परेशानियां लेकर भी बाबा के पास पहुंचते थे। उनसे दुआ की दरख्वास्त करते थे। बाबा की दुआ से उनकी मुरादें भी पूरी होतीं थीं। दाऊ बताते हैं कि बाबा के पास आने के बाद उनका मन फिर कभी यहां से जाने का नहीं हुआ। बाबा के परदा करने के बाद भी उनकी दरगाह की सेवा में लगे हैं। उनके साथ मुराद खान भी दरगाह की देखरेख करते हैं। मुराद खान ने बताया कि यहां पर हर काम मलखान दाऊ की सलाह से ही किए जाता हैं। यहां पर सही मायने में सांप्रदायिक एकता की मिसाल देखने को मिलती है। लोग लाख जहर घोलें लेकिन यहां की एकता की खुशबू सारे जहां में हमेशा महकती रही है।
चित्रा चौराहे पर हजरत कुतबुल आफताब सैयद एवज अली शाह उर्फ स्टेशन वाले बाबा की दरगाह है। इसे बाबा धाम के नाम से जाना जाता है। यहां पर भी दरगाह का सारा निजाम हिंदू ही संभालते हैं। दरगाह में हिंदू और मुसलमान फूल चढ़ाकर मुरादें मांगते हैं। रोज शाम को लंगर भी होता है। आसपास के तमाम गरीब और बेसहारा लोग इसी लंगर के सहारे रहते हैं। लंगर का खाना दरगाह में महिलाएं बनाती हैं।
शहर में हिंदू और मुसलमानों की एकता की मिसाल कायम है। मौलाना अली मियां की बनाई हुई पैगाम-ए-इंसानियत संस्था की ओर से भी तमाम सामाजिक कार्य किए जाते हैं। इस संस्था के तहत गरीब मुस्लिमों के साथ ही हिंदुओं की भी मदद की जाती है। दरगाहों के साथ इबादतखानों में भी किसी तरह का भेद नहीं किया जाता है। हमारे पास भी तमाम हिंदू भाई दुआ कराने के लिए आते हैं। मुफ्ती इमरान नदवी, मस्जिद जीवनशाह
दरगाह पर इफ्तार 23 अप्रैल को
झांसी। किले के पास स्थित हजरत इंसाफ शाह बाबा की दरगाह पर 23 अप्रैल यानी 21वें रोजे को इफ्तार पार्टी होगी। इसमें सभी लोग शिरकत कर सकते हैं। यह जानकारी बाबा के मुरीद मोहम्मद यासीन खान ने दी।