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पांच सौ मजदूरों से छिना काम

Thu, 02 Mar 2017 12:37 AM IST
jhansi
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पांच सौ मजदूरों से छिना काम - फोटो : demo
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पारीछा थर्मल पावर प्लांट की सभी छह इकाइयां 26 जनवरी की मध्य रात्रि से बंद होने के कारण यहां के दैनिक वेतन भोगी करीब पांच सौ मजदूरों के हाथ से रोजगार छिन गया है। उनके सामने परिवार चलाने का संकट है। इन इकाइयों को कम खपत और अधिक उत्पादन का हवाला देकर स्टेट लोड डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर के अधिकारियों ने बंद कराया है।
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पारीछा पावर प्लांट में छत्तीसगढ़, झारखंड व अन्य राज्यों के करीब पांच सौ मजदूर और दैनिक कर्मचारी हैं। इनको दैनिक वेतन पर ठेकेदार द्वारा रखा जाता है। इस समय प्रदेश में पर्याप्त बिजली का उत्पादन हो रहा है। जानकारी के अनुसार प्रदेश में संचालित सभी इकाइयों से करीब पांच हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। वर्तमान में डिमांड कम होने के कारण 2400 मेगावाट उत्पादन ही किया जा रहा है। पारीछा की सभी इकाई, अनपरा की नई इकाई,  पनकी तथा हरदुआ की भी कुछ इकाइयों से उत्पादन बंद किया गया है। प्लांट बंद होने के बाद ठेके पर लगे मजदूर काम न होने के कारण घर बैठ गए हैं। अधिकतर मजदूर अपने- अपने घर लौट गए हैं। 
गौरतलब है कि पारीछा थर्मल पावर प्लांट में 110 मेगावाट की दो, 210 मेगावाट की दो व 250 मेगावाट की दो इकाइयां संचालित हैं। इनमें 110 मेगावाट की नंबर एक इकाई मेंटेनेंस के कारण जुलाई 2016 से बंद चल रही है। वर्तमान में प्लांट की सभी मशीनें बंद चल रही हैं, जिससे हवा में धुआं भी दिखना बंद हो गया है।
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‘ प्लांट की पांच मशीनें 1030 मेगावाट उत्पादन करने के लिए पूरी तरह फिट हैं। बिजली की डिमांड बढ़ने लगी है। दो- चार दिनों में मशीनें चालू करने के आदेश आ जाने चाहिए।’
अखिलेश सिंह, मुख्य महाप्रबंधक, पारीछा थर्मल पावर प्लांट।

चालू है बजाज पावर प्लांट
ललितपुर स्थित बजाज पावर प्लांट की 660 मेगावाट की तीनों इकाइयों से उत्पादन चालू हैं। चूंकि, प्रदेश सरकार ने बजाज पावर प्लांट से एग्रीमेंट कर रखा है। इस कारण बजाज से बिजली लेना मजबूरी है। मालूम हो कि, सरकार को बजाज पावर प्लांट से महंगे दामों में बिजली लेनी पड़ती है। 

क्या सब प्लानिंग से हो रहा? 
प्रदेश में ऐसा पहली बार हुआ कि डिमांड कम बताकर सर्दियों में कई प्लांट बंद किए गए हाें। ऐसा लगता है सब कुछ प्लानिंग से चल रहा है। दरअसल, उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन करोड़ों रुपये के घाटे में चल रहा है। सर्दियों में बिजली की जरूरत कम महसूस होती है, इस कारण लोग बिजली न रहने पर हल्ला नहीं मचाते हैं। विभाग में चल रही चर्चाओं पर ध्यान दें तो इस अवधि में शहरी क्षेत्रों को बिजली बराबर मिलती रही, जबकि संतुलन बनाकर ग्रामीण क्षेत्रों में 12 से 16 घंटे ही बिजली दी गई। इस अवधि में कारपोरेशन ने अपनी उत्पादन इकाइयां बंद रखकर कुछ घाटा कम करने की कोशिश की।
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