अपूर्वी के मुंह से पहला शब्द ‘मां’ निकला
झांसी। मां ने नौ महीने पेट में तो पाला, लेकिन पैदा होने के बाद एक दिन भी अपने आंचल का साया नहीं दिया और फेंक दिया खुले आकाश के नीचे। नवजात पर कुत्तों ने कहर ढाया और नोंच-नोंच कर उसका एक हाथ खा गए। जी हां, हम यहां बात कर रहे हैं अपूर्वी की, जो अब शिशु विहार फाउंडलिंग होम में है। मां ने उसके साथ बेदर्दी की, लेकिन बेटी के मुंह से पहला शब्द ‘मां’ ही निकला।
16 दिसंबर की कड़कड़ाते की ठंड की रात मेडिकल कॉलेज के सामने एक गली में खुले आकाश के नीचे नवजात बालिका पाई गई थी। कुत्ते उसे नोंच रहे थे और वो चीख रही थी। अमर उजाला को जानकारी हुई तो बच्ची को तत्काल मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। यहां उसकी जान तो बच गई, परंतु तमाम कोशिशों के बाद भी डाक्टर उसका एक हाथ नहीं बचा सके। मानवता को शर्मसार करने वाली इस घटना की गूंज बाल संरक्षण आयोग तक पहुंची थी। बाल आयोग की टीम ने यहां आकर मामले की पड़ताल की थी और बच्ची को फेंकने वाले की तलाश भी की गई थी। लेकिन, मालूम नहीं चल पाया था। बाल आयोग की सदस्य डॉ. नीता साहू ने इस बच्ची को नाम ‘अपूर्वी’ दिया था। अस्पताल से छुट्टी होने के बाद अपूर्वी को खातीबाबा स्थित शिशु विहार फाउंडलिंग होम पहुंचा दिया गया था। अपूर्वी अब भी वहीं है और कुछ-कुछ बोलने की कोशिश करती है। उसके मुंह से पहला शब्द ‘मां’ ही निकला। ये सुनकर शिशु विहार में मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं।
घुटने चलने की करती है कोशिश
झांसी। शिशु विहार में रह रही अपूर्वी सामान्य बच्चों की तरह स्वस्थ है और उसकी बेहतर देखरेख भी हो रही है। वो अब घुटने के बल चलने की कोशिश भी करती है। लेकिन, चल नहीं पाती है। एक हाथ न होने की वजह से उसे सहारा नहीं मिल पाता है, जिससे वो गिर पड़ती है।