गर्मी के चरम में पहुंचने पर ट्रेनों में पानी को लेकर मारामारी शुरू हो गई है। कोचों में जल्दी- जल्दी पानी खत्म होने से यात्री शौचालय तक जाने को तरस रहे हैं। गाड़ी के रुकते ही पीने के पानी के लिए नलों पर यात्रियों की भीड़ टूट पड़ती है। शीतल जल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को नल का सादा पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
सोमवार को दोपहर 12.31 बजे रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर अप 12138 पंजाब एक्सप्रेस आकर खड़ी हुई। कुछ सेकेंड बाद ही गाड़ी में सवार यात्री प्लास्टिक की बोतलों में पानी भरने के लिए नलों पर दौड़ पड़े। कुछ ही समय में उनके बीच पानी भरने को लेकर धक्का- मुक्की शुरू हो गई। प्लेटफार्म पर लगे वाटर कूलरों में ठंडा पानी नहीं होने के कारण यात्रियों को सादा पानी से संतोष करना पड़ा। आधे घंटे बाद ही प्लेटफार्म क्रमांक चार पर 18237 डाउन छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस आकर खड़ी हुई और वैसा ही नजारा दोबारा देखने को मिला।
दरअसल, प्लेटफार्म नंबर 01 पर तीन, प्लेटफार्म 02 व 03 पर दो- दो, प्लेटफार्म 04 व 05 पर दो- दो और प्लेटफार्म छह पर एक वाटर कूलर लगा है। हर पंद्रह मिनट पर ट्रेनों का आवागमन होने व प्लेटफार्म पर मौजूद ट्रैफिक के कारण इन दिनों हर समय वाटर कूलर पर पानी भरने वाले यात्रियों की भीड़ लगी रहती है। इस कारण यात्रियों को शीतल जल नहीं मिल पा रहा है। रेल प्रशासन भी यात्रियों को शीतल जल उपलब्ध कराने में असहाय महसूस कर रहा है।
उधर, ट्रेनों के कोचों में पानी भरने की बात करें तो झांसी से पहले ट्रेनों में पानी भरा जाता है। इनमें दिल्ली की तरफ से आने वाली ट्रेनों में आगरा, इटारसी की तरफ से आने वाली ट्रेनों में भोपाल, लखनऊ की तरफ से आने वाली ट्रेनों में कानपुर व इलाहाबाद से आने वाली ट्रेनों में इलाहाबाद में पानी भरा जाता है। इस कारण झांसी तक आते - आते अधिकांश ट्रेनों में पानी खत्म हो जाता है। इन दिनों स्थिति यह बन रही है कि कोच में पानी खत्म होने पर यात्रियों को दैनिक क्रिया की निवृत्ति के लिए झांसी आने का इंतजार करना पड़ता है।
एक ट्रेन को चाहिए तीन हजार लीटर पानी
स्टेशन पर जिन हाइड्रेंट की मदद से कोचों में पानी भरा जाता है, वह 57 हजार लीटर की पानी की टंकी से जुड़े हुए हैं। एक कोच की चार टंकियों को भरने के लिए 18 सौ लीटर पानी की आवश्यकता पड़ती है। इस हिसाब से एक ट्रेन के सभी कोचों में पानी भरने के लिए कम से कम 45 हजार लीटर पानी की जरूरत पड़ती है। गर्मियों में एक ट्रेन में कम से कम 30 हजार लीटर पानी तो भरना ही पड़ता है। टंकी खाली होने पर उसे दोबारा भरने में पंद्रह मिनट से आधे घंटे का समय लग जाता है। इन स्थितियों में दो गाड़ियों से अधिक में एक साथ पानी भरना संभव नहीं हो पाता है। अगर सभी प्लेटफार्म पर चार अथवा पांच ट्रेनें आ आएं तो उन्हें एक साथ नहीं भरा जा सकता है। प्रेशर न बनने पर बहुत थोड़ा ही पानी भर पाता है। 24 घंटे में ऐसी स्थिति कई बार बन जाती है।
जनरल कोचों में सबसे अधिक परेशानी
ट्रेन के जनरल कोचों के यात्रियों को सबसे अधिक पीने के पानी की समस्या का सामना करना पड़ता है। अधिक भीड़ के कारण यात्री प्लेटफार्म पर उतर नहीं पाते हैं। इस कारण जो यात्री कोच में बैठे रहते हैं, उन्हें एक - एक बूंद पानी के लिए तरसना पड़ता है।
पंजाब व कानपुर की ओर से आने वाली ट्रेनों का बुरा हाल
पंजाब व कानपुर से जो भी ट्रेनें आती हैं, उनमें बहुत अधिक भीड़ रहती है। इन ट्रेनों के यात्री तपती गर्मी का सामना करते हुए आते हैं। इससे ट्रेन में पानी की बहुत अधिक मांग रहती है। पंजाब से आने वाली ट्रेनों में आगरा आते - आते व कानपुर से आने वाली ट्रेनों में उरई आते - आते पानी खत्म हो जाता है। इस कारण यात्री हंगामा करने पर मजबूर हो जाते हैं।