झांसी। प्रदेश में फिल्म सिटी बन रही है। इससे उत्साहित कलाकारों का कहना है कि नई फिल्म इंडस्ट्री में इस बात का ध्यान रखा जाए कि कहीं बुंदेलखंड की प्रतिभाओं को नजरअंदाज न किया जाए। प्रदेश में यह नियम बने कि सभी सिनेमा हॉल में बुंदेलखंड की फिल्मों को दो अथवा तीन शो अवश्य दिखाया जाए। ये फिल्मे टैक्स फ्री हों। इससे मराठी, तेलगू, मलयालम फिल्म इंडस्ट्री की तरह बुंदेली फिल्मों एवं प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का पर्याप्त अवसर प्राप्त होगा।
बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री को कई दिग्गज फिल्म कलाकार, निर्देशक, तकनीशियन, गीतकार देने वाले बुंदेलखंड में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। बॉलीवुड के लगभग सभी बैनरों में यहां की प्रतिभाओं ने काम किया है। नोएडा में फिल्म इंडस्ट्री बनने से स्थानीय प्रतिभाएं खुश है। इनका मानना है, कि अवसर तो मिलेंगे। लेकिन उपेक्षा भी हो सकती है। ऐसे में फिल्म प्रोडक्शन कंपनियों एवं सरकार को इस बात पर जरूर ध्यान देना होगा।
फिल्म सिटी का केंद्र बुंदेलखंड में बनना चाहिए। साथ ही सरकार को इस ओर भी ध्यान देना होगा, कि प्रदेश के खासकर बुंदेलखंड के कलाकारों की उपेक्षा न हो।
धर्मेंद्र खरे फिल्म एवं टेलीविजन सीरियल कलाकार
बुंदेली फिल्म बनाने वाली प्रोडक्शन कंपनियों को सब्सिडी दी जाए। इसके साथ ही यह फिल्में टैक्स फ्री होनी चाहिए। बुंदेली फिल्मों के लिए थियेटर भी होने चाहिए।
अशोक देवलिया टेलीविजन कलाकार
प्रदेश के सिनेमाघरों में बुंदेली फिल्मों का दिखाना अनिवार्य होना चाहिए। इससे बुंदेलखंड के फिल्मों की पहचान तेलगू, मराठी फिल्म इंडस्ट्री की तरह होगी।
राकेश विश्वकर्मा टेेलीविजन कलाकार
नई फिल्म सिटी से क्षेत्रीय भाषाओं एवं कलाकारों को पर्याप्त अवसर मिलेगा। निश्चित है कि बुंदेली लोक संस्कृति को फिल्मों के माध्यम से विदेश में पहचान मिलेगी।
अजीम शेख अभिनेता
राकेश विश्वकर्मा - फोटो : REPORTERS