झांसी। प्रेमनगर के नगरा हाट के मैदान के पास 74 एकड़ में बनने वाले नई कोच फैक्टरी का काम तेजी के साथ शुरू हो गया है। प्रेमनगर के लोगों के लिए नीम माता मंदिर के पास से कंक्रीट सड़क का निर्माण शुरू हो गया है। इस मैदान में आ रहे पेड़ काटने और क्वार्टरों को तोड़ने का काम भी शुरू हो गया है। इस कार्य का भूमि पूजन 23 अक्तूबर को हुआ था।
केंद्र सरकार ने रेल कोच नवीनीकरण कारखाना के निर्माण की 2018 में मंजूरी दी थी। इसका निर्माण 450 करोड़ की लागत से होना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 फरवरी 2019 को भोजला मंडी में प्रेमनगर में बनने वाली नई कोच फैक्टरी का शिलान्यास किया था। रेलवे बोर्ड ने रेल विकास निगम लिमिटेड को फैक्टरी बनाने का काम सौंपा है। इस फैक्टरी का निर्माण 74 एकड़ जमीन पर होना है। पहले इस फैक्टरी को नगरा हाट के मैदान से कैथड्रिल स्कूल के पीछे तक खाली पड़ी रेलवे की जमीन पर बनना था। लेकिन लोगों के विरोध के कारण नगरा के हाट के मैदान की जमीन को छोड़ दिया गया है। इस जमीन की कमी को पूरा करने के लिए आवासों के टूटने की संख्या बढ़ा दी गई है । विगत 23 अक्तूबर को आरवीएनएल ने संबंधित कंपनी के साथ भूमि पूजन किया था। भूमि पूजन के बाद तेजी से काम शुरू कर दिया गया है। प्रेमनगर क्षेत्र के लोगों को रेलवे कॉलोनी से निकलने के लिए नई कंक्रीट की सड़क बनाई जा रही है। यह सड़क नीम माता मंदिर के पास से होकर बनाई जा रही है। ट्रैफिक के हिसाब से सड़क को 40 मीटर चौड़ी बनाया जा रहा है। जंगल वाले क्षेत्र में पेड़ और झाड़ियों को काटने का काम शुरू कर दिया गया है। कर्मचारियों से खाली कराए गए क्वार्टरों को तोड़ने का काम शुरू हो गया है। कर्मचारियों के लिए 160 नए क्वार्टरों का निर्माण कार्य चल रहा है। कारखाने में प्री- इंजीनियरिंग बिल्डिंग शेड 65 हजार वर्ग मीटर होगा। अपशिष्ट जल रिसाइक्लिंग प्लांट, शेड की छत पर पांच सौ किलोवाट का सौर प्लांट लगेगा। फैक्टरी का निर्माण 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
हर साल बनेंगे 250 कोच
इस फैक्टरी में हर साल 250 लिंके हॉफमेन बुश कोच (एलएचबी) को सजाने (मरम्मत) का काम होगा। कारखाना में अत्याधुनिक मशीनरी और प्लांट होंगे, जिनमें रोबोटिक आर्म पेंट बूथ, शॉट ब्लास्टिंग प्लांट, बोगी असेबलिंग में ऑटोमशन और रिमोट कंट्रोल से लैस ईओटी क्रेन शामिल हैं। फैक्टरी में एक हजार से अधिक युवाओं को स्थायी रोजगार मिल सकेगा। साथ ही परोक्ष रूप से भी सैकड़ों लोगों को काम मिल सकेगा।
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नई कोच फैक्टरी में लिंके हॉफमेन बुश (एलएचबी) डिब्बों का निर्माण होगा। यह एक ऐसी आधुनिक प्रौद्योगिकी है, जो ट्रेन के पटरी से उतरने के दौरान डिब्बों को पलटने से रोकती है। रेल मंत्रालय ने पारंपरिक आईसीएफ डिब्बों का निर्माण 2019 से पूरी तरह बंद कर दिया। सिर्फ एलएचबी डिब्बों का उपयोग होगा। इन कोचों की गति 160 से 200 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। इनमें एंटी टेलीस्कोपिक सिस्टम होता है, जिसके कारण यह डिब्बे आसानी से पटरी से नहीं उतर पाते। यह डिब्बे स्टेलनेस स्टील और एल्यूमीनियम के बने होते हैं, जबकि आईसीएफ डिब्बे माइल्ड स्टील के बने होते हैं। यह डिब्बे अलग तरह की कपलिंग से जोड़े जाते हैं। इन दिनों कोच कारखानों में एलएचबी डिब्बों को बनाने का काम तेजी से चल रहा है।