हिंसा की घटना होने पर महिलाएं और छात्राएं घटना को छिपाए नहीं। उसे अपने परिवारीजनों एवं अभिभावकों के साथ साझा करें। चुप रहने से हिंसा को बढ़ावा मिलता है और चुप्पी के खिलाफ खुलकर बोलने से हिंसा में कमी आती है। बीयू में अंतरराष्ट्रीय महिला हिंसा निवारण दिवस पर ‘साहित्य, संस्कृति, मीडिया, सिनेमा, कला में महिला हिंसा’ विषयक जागरूकता संगोष्ठी में यह बात कुलानुशासक प्रो. एमएल मौर्या ने की।
मुख्य अतिथि हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मुन्ना तिवारी ने विभिन्न कथाओं व कविताओं का उदाहरण देते हुए छात्राओं से संगठित होकर हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया। पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सीपी पैन्युली ने महिला हिंसा रोकने में मीडिया की भूमिका का जिक्र करते हुए कह कि मीडिया की सजगता से ही महिला हिंसा की घटनाओं में कमी आई है और लोग महिला गरिमा के प्रति संवेदित हुए हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया के उच्च आदर्शों के कारण ही पीड़िता की पहचान गोपनीय रखी जाती है और लोग धीरे-धीरे महिला अधिकारों की वकालत कर रहे हैं। ललित कला विभाग की समन्वयक डॉ. श्वेता पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं का सम्मान भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहा है।
एनएसएस की तृतीय व पंचम इकाई के स्वयंसेवकों ने भी परिचर्चा में भाग लिया। इस दौरान डॉ. पुनीत बिसारिया, डॉ. शमीम अंसारी, डॉ. अजय गुप्ता, डॉ. नवीन चंद्र पटेल, मेघा झा मौजूद रहे।