संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। मुकद्दस रमजान में रोजेदारों की शंकाओ को दूर करने लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है। हेल्पलाइन नंबर पर आने वाले सवालों को उलमा शरीयत की रोशनी में सवालों के जवाब दे रहे हैं। हेल्पलाइन नंबर पर मिशन कंपाउंड निवासी एक वरिष्ठ नागरिक ने सवाल किया कि बीमारी के चलते रोजे की हालत में इन्हेलर लिया जा सकता है। उलमाओं ने जवाब दिया कि रोजे की हालत में इन्हेलर लेने से रोजा टूट जाएगा।
हेल्पलाइन नंबर पर प्रेमनगर निवासी एक रोजेदार ने पूछा कि सहरी के बाद सो गया इसके बाद उठा तो बेखयाली में थोड़ा सा पानी पी लिया तो क्या रोजा टूट गया। शरीयत की रोशनी में उलमाओं ने बताया कि रोजे की हालत में जानबूझ कर खाने अथवा पीने से ही रोजा टूटता है। धोखे में खाने और पीने से रोजा नहीं टूटता है। सिविल लाइन निवासी एक महिला ने पूछा सहरी के वक्त आंख लग गई और बिना कुछ खाए पीए ही रोजा रख लिया रोजा होगा या नहीं। उलमाओं ने कहा सहरी खाना सुन्नत है लेकिन किसी वजह से सहरी नहीं कर सके और रोजा रख लिया तो रोजा माना जाएगा। प्रेमनगर निवासी युवक ने हेल्पलाइन नंबर पर सवाल किया कि नापाकी की हालत में सहरी कर रोजा रखा जा सकता है। उलमाओं ने जवाब दिया कि अगर सहरी में वक्त कम है तो पहले सहरी कर रोजा रखा जा सकता है। उसके बाद नहाकर गुस्ल कर सकते हैं। सीपरी बाजार निवासी एक बुजुर्ग ने सवाल किया कि बीमारी के कारण डॉक्टरों ने रोजा रखने से मना किया है तो क्या गुनाह के हकदार होंगे। उलमाओं ने कहा जिस्मानी परेशानी होने पर रोजा छोड़ने पर गुनाह नहीं होगा। रोजा नहीं रखने पर फिदिया की रकम अदा करना होगी। जो पचास रुपये तय है। मुफ्ती मोहम्मद आरिफ नदवी ने बताया कि हेल्पलाइन नंबरों पर आने वाले सवालों के जवाब इस्लाम की रोशनी में ही दिए जा रहे हैं।