संवाद न्यूज एजेंसी झांसी। वायरल बुखार की तरह ही जिले में सर्वाइकल के मरीज मिल रहे हैं। मामूली लगने वाली सर्वाइकल की समस्या बड़ी परेशानी का कारण बन रही है। जिला अस्पताल में औसतन 40 मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं, जो सर्वाइकल की गंभीर समस्या से परेशान हैं। यहां आने वाले मरीजों में बड़ी संख्या उन लोगों की है, जो मोबाइल फोन और कंप्यूटर का इस्तेमाल गलत ढंग से कर रहे हैं।
मंडलीय चिकित्सा अधीक्षक और हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार कटियार ने बताया कि जिला अस्पताल में प्रतिदिन 40 से 45 मरीज ऐसे आ रहे हैं, जिन्हें लंबे समय से गर्दन में दर्द, गर्दन अकड़ जाना और हिलाने-डुलाने में परेशानी होना, हाथ-पैर और पंजों में झुनझुनी, सुन्न महसूस होना या उसमें कमजोरी लगना, सिर के पिछले भाग और कंधों में दर्द, शरीर में असंतुलन और चलने में दिक्कत, मांसपेशियों में ऐंठन की शिकायत है। यह स्थिति तब होती है जब लोग इसे मामूली समझकर दर्द निवारक दवाएं खा लेते हैं। बताया कि कुछ मरीज ऐसे भी आ रहे हैं कि जिन्हें यह समस्या अधिक गंभीर स्थिति तक ले आई है। यदि वह अपनी दिनचर्या में बदलाव नहीं करते हैं तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
सीटी स्कैन से पता चल रही रोग की गंभीरता
जिला अस्पताल में पीपीपी मॉडल के तहत दी जा रही सीटी स्कैन से सर्वाइकल की समस्या और उसकी गंभीरता का पता लगाया जा रहा है। हड्डी रोग विशेषज्ञ और नोडल अधिकारी डॉ. गोकुल प्रसाद ने बताया कि समस्या का पता लगने के बाद इलाज की प्रक्रिया के तहत फिजियोथैरेपी भी की जा रही है।
0 घातक हो रही समस्या
डॉ. गोकुल प्रसाद ने बताया कि स्पाइनल टुबर्म्यलोसिस भी एक खतरनाक स्थिति है। हड्डियों में फ्रैक्चर होने के कारण रीढ़ की हड्डियों में इन्फेक्शन हो सकता है। स्पाइनल टुबर्म्यलोसिस के कारण एक से अधिक हड्डियां क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। समय रहते इलाज जरूरी है वरना, स्पाइनल कॉर्ड में नसों के दबने से शरीर के निचले भाग को लकवा मार सकता है।
वर्जन
अस्पताल में सर्वाइकल के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। सीटी स्कैन से बीमारी की गंभीरता का पता लगाकर इलाज किया जा रहा है। लेकिन, फिर भी लोगों को अपनी दिनचर्या में बदलाव करना जरूरी है। साथ ही समय समय पर विटामिन डी की भी जांच कराएं। साथ ही जितना संभव हो मोबाइल और कंप्यूटर का कम इस्तेमाल करें।
डॉ. प्रमोद कुमार कटियार, मंडलीय चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल।