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बारिश की लेटलतीफी बढ़ा रही चिंता

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नगर में बरसात न होने के कारण जहां आम जनता गर्मी व उमस से परेशान है वहीं किसान की रात की नींद व दिन का
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झांसी। करीब आधा मानसून बीत जाने के बावजूद पर्याप्त बारिश न होने से सब पेरशान हैं। उमस भरी गर्मी ने लोगों को बेहाल कर रखा है। मरीजों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। घर-घर लोग खांसी, जुकाम, बुखार, एलर्जी आदि रोगों की गिरफ्त में हैं। उधर, बुंदेलखंड में खेत सूखे पड़े हैं। फसल की बुवाई लायक पानी खेतों में न होने से किसान मायूस हैं। कुछ दिनों के भीतर अगर झमाझम बारिश नहीं हुई तोअन्नदाताओं के सामने संकट का आना तय दिखता है। बारिश न होने से धान रोपाई काफी पिछड़ चुकी है। दलहन की फसल पर भी संकट के बादल घिरे हुए हैं।
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पिछले वर्ष जून-जुलाई तक कुल करीब 277 मिमी बारिश हुई थी लेकिन, अभी महज 135 एमएम बारिश ही हुई है। इतनी कम बारिश होने से खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंचा। धान की रोपाई को इससे सर्वाधिक नुकसान हो रहा है। मोंठ में सबसे अधिक धान की रोपाई होती है लेकिन, कृषि अधिकारियों के मुताबिक अभी 15 फीसदी ही रोपाई हुई है हालांकि मूंगफली, उरद समेत अन्य दलहनी फसलों की काफी हद तक बुवाई पूरी हो चुकी। अब इनको भी पानी की आवश्यकता पड़ रही है। कृषि के लिहाज से अगले बीस-तीस दिन काफी महत्वपूर्ण हो गए। अगर समय पर पानी नहीं बरसा तब बुंदेलखंड में किसानोें को एक बार फिर संकट का सामना करना पड़ सकता है।
दो दिन बारिश की संभावना
मानसून विभाग की ओर से झांसी में 19 एवं 20 जुलाई को झमाझम बारिश होने की संभावना जताई गई है। कृषि विभाग के लिए जारी अलर्ट के मुताबिक दो दिनों तक यहां भरपूर बारिश होगी। इनमें ग्रामीण इलाके भी शामिल हैं। कृषि विभाग की ओर से खेतों में पानी आने पर किसानों को धान रोपाई की सलाह दी गई है।
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सबसे अधिक मूंग की बुवाई
बारिश की लेटलतीफी के बावजूद किसानों ने उम्मीद में ही धान को छोड़कर अन्य फसलों की बुवाई पहले ही पूरी कर ली है। कृषि विभाग के मुताबिक अभी तक मक्का 7.52 प्रतिशत, ज्वार 4.96 प्रतिशत, बाजारा 20.83 प्रतिशत, उर्द 22.34 प्रतिशत, मूंग 43.88 प्रतिशत, अरहर 31.39 प्रतिशत, मूंगफली 40.99 प्रतिशत, सोयाबीन 22.76 प्रतिशत एवं तिल की 23.77 प्रतिशत रकबे में बोवाई हो चुकी। झांसी में इस बार कुल 232155 हेक्टेयर में फसल आच्छादन का आकलन किया गया है।
नहर चलाए जाने की जरूरत
बुवाई के सीजन में भी पर्याप्त बारिश न होने से नहर चलाए चलाने की मांग शुरू हो गई है। मोंठ से किसान प्रतिनिधियों ने तत्काल नहर संचालित करने की मांग की है। गरौठा विधायक जवाहर लाल राजपूत ने धान की बुवाई में विलंब को देखते हुए बेतवा नहर चालू करने की मांग की है। विधायक ने मंडलायुक्त से पत्र के जरिए कहाकि मुख्य बेतवा नहर के जरिए परीछा बांध से एक हजार क्यूसेक तक पानी छोड़ा जा सकता है। इससे किसानों को बुवाई में मदद मिल सकेगी।
पिछले दस साल के दौरान बारिश के आकड़े
वर्ष जून एमएम में जुलाई
2010 25.4 252.3
2011 264.2 288.76
2012 12.24 328.24
2013 178.28 328.78
2014 32.04 154.29
2015 25.22 216.26
2016 29.44 269.66
2017 90.70 144.54
2018 40.85 290.62
2019 35.86 242.43
2020 32.11 -----
बारिश कम हुई है लेकिन, मानसूनी सीजन अभी बना हुआ है। ऐसे में पर्याप्त बारिश की उम्मीद की जा रही है। अगर पर्याप्त बारिश नहीं हुई तब सितंबर महीने से ही सूखा संबंधी कार्रवाई आरंभ की जाएगी हालांकि विकल्प के तौर पर किसान तिल आदि की बुवाई कर रहे हैं। - के के सिंह जिला कृषि अधिकारी
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