झांसी। ग्यारह साल से जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए अफसरों के चक्कर काट रहा था किसान रघुवीर पाल। समाधान दिवस में भी कई प्रार्थना पत्र दिए लेकिन हुआ कुछ नहीं। बीते दिन भी वह मोंठ में समाधान दिवस में अर्जी लगाने गया था लेकिन वहां से लौटते हुए रास्ते में पेड़ से लटककर फांसी लगा ली। सुसाइड नोट में उसने पूरी पीड़ा व्यक्त की। कानूनगो और लेखपाल पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया। इन दोनों को निलंबित भी कर दिया गया था। लेकिन खास बात यह है कि जिस परिवार पर भ्रष्ट सिस्टम की वजह से दुखों का पहाड़ टूटा हो उनका हाल जानने के लिए एक अफसर तक नहीं गया। विधायकों को भी फुर्सत नहीं मिली।
पूंछ थाना इलाके के ग्राम फतेहपुर स्टेट निवासी किसान रघुवीर पाल (68) से राजस्व निरीक्षक सत्यनारायण तिवारी एवं लेखपाल हेमंत राजपूत जमीनी विवाद सुलझाने के एवज में 18 हजार रुपये की घूस मांग रहे थे। रघुवीर के पास से जो सुसाइड नोट मिला है उसमें इस बात का जिक्र है। परिवार वालों का कहना है कि वे लोग बेहद गरीब हैं। पैसे थे नहीं लिहाजा कानूनगो और लेखपाल से काफी विनती की लेकिन किसी ने नहीं सुनी। 1976 में चकबंदी के दौरान उनके खेत की 65 डिसमिल जमीन पड़ोसी ने अपने खेत में मिला ली थी। 11 साल पहले मोंठ तहसील प्रशासन में प्रार्थना पत्र भी दिया था लेकिन इसके बाद भी लंबे समय तक नक्शा दुरुस्तीकरण का मुकदमा चला। बाद में जमीन का नक्शा दुरुस्त किया गया। 15 दिन पहले ही राजस्व निरीक्षक सत्यनारायण तिवारी और लेखपाल हेमंत राजपूत ने हदबंदी की थी। इसके बाद भी 17 डिसमिल जमीन कब्जा मुक्त नहीं हो पाई थी। लिहाजा शनिवार को रघुवीर पाल मोंठ में समाधान दिवस में पहुंचे और जमीन से कब्जा हटवाने की मांग की। आरोप लगाया गया कि यहां लेखपाल ने उनसे दस हजार रुपये और राजस्व निरीक्षक ने आठ हजार रुपये मांगे। उसके पास तो किराये के भी पैसे नहीं थे। निराश रघुवीर पाल को लगा कि अब जमीन खाली नहीं होगी तो वह समाधान दिवस से लौट आया और गांव के पास एक पेड़ पर लटककर फांसी लगाकर जान दे दी। किसान की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। माना जा रहा था कि अधिकारी उसके घर पर जाएंगे। विधायकों की गाड़ियां भी धुंध भरे रास्तों पर दौड़ेंगी। लेकिन एक अफसर नहीं पहुंचा।
तहसीलदार किसान के घर नहीं गए बल्कि फोन करके बेटे को थाने पर बुलवाया
झांसी। सुनवाई न होने से दुखी किसान ने फांसी लगाकर जान दे दी। शासन तक मामला गूंज रहा है लेकिन अफसर फिर भी पीड़ित परिवार को सांत्वना देने नहीं पहुंचे। मृतक किसान रघुवीर पाल के बेटे जियालाल ने बताया कि शाम को पूंछ थाने के थानाध्यक्ष का फोन आया था। वह कह रहे थे कि थाने पर तहसीलदार आए हुए हैं और वह मिलना चाहते हैं। लिहाजा आप सभी अपने परिवार को लेकर थाने पर आ जाइए। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी अफसर पीड़ित के घर क्यों नहीं गए।