संवाद न्यूज एजेंसी
कोछाभांवर। बुंदेलखंड में वसंत पंचमी से फाग गीतों का मधुर गायन शुरू हो गया है। नगढि़यों और ढोलक के मधुर स्वर गूंजने लगे हैं। यह फाग गायन रंग पंचमी तक होंगे। इसके साथ ही होली की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।
प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण बुंदेलखंड में वसंत पंचमी का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। बुंदेली लोक कलाकार नगढि़यों, ढोलक आदि वाद्य यंत्रों की पूजा करते हैं। सरसों के फूल देवी-देवताओं को अर्पित किए जाते हैं। कई स्थानों पर होली के डांढ़ा भी गाड़े जाते हैं। इसके साथ ही होली की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं। फाग और होली गीतों के मधुर स्वर चहुंओर गूंजने लगते हैं।
बुंदेलखंड में वसंत पंचमी से रंग पंचमी तक लोक कवि ईसुरी की फाग और अन्य लोक कवियों के चौकड़िया, छंद और होली के गीत गाए जाते हैं। फाग गायन की तैयारियां हर जगह शुरू होती हैं। - पन्नालाल असर, वरिष्ठ साहित्यकार
बुंदेलखंड में वसंत पंचमी पर बुंदेली वाद्य यंत्रों नगढि़या, सारंगी, ढोलक आदि की पूजा करने की परंपरा है। इसके बाद इन बुंदेली वाद्य यंत्रों का वादन किया गया। - सीताराम कुशवाहा
वसंत पंचमी पर मां सरस्वती की आराधना एवं देवताओं को सरसों के पीले फूल अर्पण किए जाते हैं। मंदिरों में फाग एवं मधुर भजन तथा बुंदेली व ब्रज के गीत गाए जाते हैं। - महंत मार्तंड स्वामी