झांसी। कोरोना महामारी के बीच मजदूर व कामगारों के अपने घर लौटने से तमाम शहरों की फैक्टरियों में उत्पादन लगभग ठप है। दोबारा काम शुरू करने के लिए मजदूरों का होना जरूरी है। यही कारण है कि फैक्टरी मालिक व ठेकेदार खुद ही मजदूरों को फोन करके उनसे वापस आने का आग्रह कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि काम पर लौट आओ, भोजन, स्वास्थ्य जैसी सभी जरूरतों का ध्यान रखेंगे। हर दिन झांसी स्टेशन से तीन हजार से अधिक मजदूर व कामगार लौट रहे हैं। इनमें बुंदेलखंड समेत प्रदेश के कई शहरों के आसपास गांव के लोग शामिल रहते हैं।
बुंदेलखंड के महोबा जिले के गांव चुर्खी में रहने वाले भगवानदास ने बताया कि वे परिवार के अन्य सदस्यों के साथ बंगलूरू की एक चप्पल फैक्टरी में काम करते हैं। लॉकडाउन के बाद वे श्रमिक एक्सप्रेस में सवार होकर घर लौट आए थे। कुछ दिन पहले उनके पास फैक्टरी मालिक का फोन आया। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी तो चलती रहेगी। काम पर वापस लौट आओ। उनका व उनके परिवार का पूरा ध्यान रखा जाएगा। ऐसे तमाम मजदूर व कामगार हैं, जिनको इन दिनों ठेकेदार व फैक्टरी मालिक उनको आग्रह कर काम पर वापस बुला रहे हैं। यही कारण है कि बड़ी संख्या में श्रमिक व कामगारों ने लौटना शुरू कर दिया है। श्रमिकों का कहना है कि कोरोना महामारी कब तक चलेगी इसका अब कोई भरोसा नहीं है। काम नहीं करेंगे तो आगे का जीवन कैसे चलाएंगे? इनमें अधिकांश लोग दक्षिण भारत व महाराष्ट्र के शहरों की तरफ लौट रहे हैं। यही कारण है कि एक जून से जो अप और डाउन की 28 स्पेशल ट्रेनें शुरू की गई थीं, अब उनमें एक बर्थ भी खाली नहीं मिल रही है। जबकि शुरुआत के दिनों में यह गाड़ियां खाली चल रही थीं।
विगत 25 मार्च से लॉकडाउन लगने पर लाखों लोग दूसरे शहरों में फंस गए थे। इन लोगों की बढ़ती परेशानी को देखते हुए राज्य सरकारों की आपसी सहमति के बाद श्रमिक ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया था। इन ट्रेनों से मजदूर व कामगारों को उनके घर तक पहुंचाने का काम किया गया था।
थोड़ी ही देर में टूट गई सोशल डिस्टेंसिंग
रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन पांच हजार से अधिक यात्री गंतव्य स्टेशनों के लिए जा रहे हैं। इसमें श्रमिक, कामगार व अन्य यात्री शामिल रहते हैं। चूंकि, ट्रेन आने के पहले ही संबंधित गाड़ी के यात्रियों को डेढ़ घंटे पहले ही प्लेटफार्म पर प्रवेश दिया जा रहा है। इस कारण बाकी दूसरी ट्रेनों के यात्रियों को स्टेशन के सामने बने यात्री शेड के नीचे ही बैठना पड़ता है। मगर, जिस तरह यात्री बढ़ रहे हैं, उस हिसाब से यात्री शेड छोटा पड़ने लगा है। शनिवार की शाम यात्रियों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए आरपीएफ व टिकट चेकिंग स्टाफ को अभियान चलाना पड़ा। इस बीच तमाम यात्री सड़कों के फुटपाथ तक पर बैठ गए। आरपीएफ व टिकट चेकिंग स्टाफ के जाते ही स्थिति जस की तस हो गई।
इन ट्रेनों का हो रहा है संचालन
इन दिनों 02779/02780/07305/07506 वास्कोडिगामा निजामुद्दीन गोवा एक्सप्रेस (प्रतिदिन), 01015/01016 गोरखपुर लोकमान्य तिलक कुशीनगर एक्सप्रेस (प्रतिदिन), 2156/02155 निजामुद्दीन हबीबगंज भोपाल एक्सप्रेस (प्रतिदिन), 02533/02534 लखनऊ मुंबई पुष्पक एक्सप्रेस (प्रतिदिन), 02617/02618 निजामुद्दीन अर्नाकुलम मंगला एक्सप्रेस, 02629/02630 नई दिल्ली यशवंतपुर कर्नाटका संपर्क क्रांति (सप्ताह में दो दिन), 02723/02724 नई दिल्ली हैदराबाद तेलंगाना एक्सप्रेस (प्रतिदिन), 02715/02716 नांदेड अमृतसर सचखंड एक्सप्रेस (प्रतिदिन), 02805/02806 विशाखापटनम नई दिल्ली एपी एक्सप्रेस (प्रतिदिन), 02181/02182 निजामुद्दीन जबलपुर एक्सप्रेस, 09165/09166 अहमदाबाद दरभंगा साबरमती एक्सप्रेस, 09167/09168 अहमदाबाद वाराणसी साबरमती एक्सप्रेस, 02541/02542 गोरखपुर लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस (प्रतिदिन), 02285/ 12286 सिकंदराबाद निजामुद्दीन दूरंतो एक्सप्रेस (सप्ताह में दो दिन) संचालन हो रहा है। इसके अलावा चार जोड़ी राजधानी स्पेशल ट्रेनें भी गुजर रहीं हैं।