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हादसे में सब खत्म नहीं होता, जिंदगी तुम्हारा इंतजार कर रही है बिटिया

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झांसी। कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है। कवि नीरज की कविता को याद करो। जिंदगी की मुख्यधारा तुम्हारा इंतजार कर रही है। बिटिया तुमने कोई गुनाह नहीं किया है। गुनाह तो तुम्हारे साथ हुआ है। फिर तुमने खुद को घर में कैद क्यों कर लिया। गुनहगार सलाखों के पीछे जिंदगी काट रहे हैं। पूरा शहर और समाज आज तुम्हारा हौसला बढ़ाने को तैयार है।
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रानी झांसी की राजधानी के सैकड़ों लोगों के यही मनोभाव हैं। डेढ़ साल पहले शहर की एक बेटी के साथ आठ छात्रों ने दरिंदगी की। वे पकड़े गए और आज उन्हें गुनाह की सजा मिलेगी। लेकिन बेटी को इस हादसे ने तोड़ दिया। इन 23 महीनों में वह घर से नहीं निकली। किसी बाहरी से मिलने में वह कांप जाती है। उसके दिन उदास और रातें रोते हुए बीतती हैं। आज सारा शहर उससे कह रहा है कि इस जकड़न की जजीरों को वह तोड़ फेंके। क्योंकि कुछ हादसों से जिंदगी नहीं खत्म होती।
शर्मसार कर देने वाली इस घटना को 11 अक्तूबर 2020 उस समय अंजाम दिया गया था, जब पीड़िता घर से निकलकर ट्यूशन पढ़ने जा रही थी। पॉलिटेक्निक के पास पहुंचने पर आरोपी छात्र उसे बेरहमी से खींचते हुए हॉस्टल में ले गए थे। इस दौरान उन्होंने हॉस्टल के एक कमरे में छात्रा के साथ दरिंदगी की थी। इतना ही नहीं, वीडियो बनाकर छात्रा को ब्लैकमेल भी किया था। उसकी जेब में रखे एक हजार रुपये निकाल लिए थे, जबकि दो हजार रुपये लेने के लिए एक आरोपी उसे अपने साथ साइबर कैफे तक ले गया था। यहां बार कोड के जरिये उससे जबरियां पैसे निकलवाए थे। इस घटना के बाद से पीड़ित बेटी खुद को घर में कैद किए हुए है। पीड़िता के पिता ने बताया कि परीक्षा देने के लिए परिवार के लोग उसे बड़ी मुश्किल से कॉलेज जाने के लिए तैयार कर पाए थे, इसके अलावा तो वह परिवार में होने वाले आयोजनों तक में शामिल नहीं हुई। घर में आने-जाने वाले लोगों से भी वह मिलने व बात करने से कतराती है। घटना का भयानक मंजर याद आने पर अक्सर नींद से चौंककर जाग जाती है। पिता ने बताया कि उनकी इकलौती बेटी हमेशा हंसती-खिलखिलाती रहती थी। लेकिन, घटना के बाद से उसके चेहरे पर मुस्कान देखने को वह तरस गए हैं। चेहरे पर उदासी छाई रहती है। उसके दिमाग में गहरा सदमा बैठा हुआ है।
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हालांकि, घटना में शामिल सभी आठों छात्रों को अदालत ने शनिवार को दोषी करार दे दिया है, जिन्हें सोमवार को सजा सुनाई जाएगी।
साहस से सलाखों के पीछे पहुंचाया
झांसी। पीड़िता के पिता ने बताया कि उनकी बेटी घटना को लेकर सदमे में भले ही है, परंतु अदालत में उसने पूरे साहस से काम लिया। घटना के बाद पीड़ितों की पहचान की और इसके बाद अदालत में मुकदमे की सुनवाई के दौरान मुखर होकर उसने आपबीती बताकर बयान दर्ज कराए। इसी का नतीजा है कि सभी आरोपी न्यायालय की ओर से दोष सिद्ध करार दिए गए हैं।
प्रलोभन भी मिला और धमकी भी
झांसी। पिता ने बताया कि मुकदमे के दौरान उन्हें विपक्षियों की ओर से समझौता करने के लिए तमाम प्रलोभन दिए गए। लेकिन, उन्होंने ठान रखा था कि अभियुक्तों को उनके मुकाम पर पहुंचाकर ही रहेेंगे। जब प्रलोभन से बात नहीं बनी तो उन्हें धमकाया भी गया। इसकी शिकायत उन्होंने प्रशासन से की थी। इस पर उन्हें सुरक्षा भी मुहैया कराई गई थी।
दोषी करार देने से संतोष, मिले कड़ी सजा
झांसी। पिता ने बताया कि उन्हें न्यायालय पर हमेशा से ही पूरा भरोसा था। न्यायालय ने आठों आरोपियों को दोष सिद्ध करार दिया है। इससे बेटी और परिवार के अन्य सभी लोगों को संतोष है। पूरी उम्मीद है कि न्यायालय से सभी को कड़ी सजा सुनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि पुलिस और प्रशासन की ओर से भी उन्हें हमेशा सहयोग मिला।
अदालत आज करेगी सजा का एलान
झांसी। सामूहिक दुष्कर्म कांड के सभी आठ आरोपियों को शनिवार को अपर सत्र न्यायाधीश (रेप एवं पॉक्सो एक्ट) नितेंद्र कुमार सिंह की अदालत ने दोष सिद्ध करार दे दिया है। उन्हें सजा सोमवार को सुनाई जाएगी। ग्यारह संगीन धाराओं में सजा का एलान किया जाएगा। विदित हो कि घटना के बाद से सभी आठों आरोपी जेल में बंद हैं।
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