अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। यदि कोई अकेला बैठकर बात करता है, हमला या मारपीट कर रहा है, किसी का भी भ्रम रहता है या बेवजह शक करता है तो ये सिजोफ्रेनिया (मानसिक बीमारी) के लक्षण हैं। यह अत्यधिक चिंता व तनाव, नींद नहीं आने और गांजा के सेवन करने वालों को होती है। इसके रोगी लगातार बढ़ रहे हैं। जिला अस्पताल के मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में हर तीसरा मरीज इसी मर्ज का आ रहा है।
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. शिफाका जाफरीन ने बताया कि सिजोफ्रेनिया गंभीर मानसिक बीमारी है। इससे रोगी के सोचने, महसूस करने और व्यवहार में बदलाव होता है। रोगी को एकाकी रहना पसंद होता है। जब यह बीमारी हो जाती है, तो उसे दवाओं से नियंत्रित किया जाता है। एकदम ठीक होने की कम उम्मीद होती है। वह बताती हैं कि इस मर्ज की चपेट में आने वाला रोगी किसी पर भी विश्वास नहीं करता है। उसे हरेक के प्रति किसी न किसी बात को लेकर शक रहता है। इसकी वजह से भ्रम की स्थिति बनी रहती है।
जब रोगी की नींद पूरी नहीं होती है, तो वह उग्र व्यवहार करने लगता है। कभी मारपीट तो कभी घातक हमला भी कर सकता है। यह रोगी एकांत में बैठकर बातचीत करता रहता है, क्योंकि उसे अपने अलावा किसी दूसरे के होने का अहसास होता है। जो भी चीज रोगी के दिमाग पर चढ़ जाती है, वह दिखाई देने लगती है। कई परिवार समस्या का निदान कराने के बजाय जादू-टोना आदि में लग जाते हैं, इससे मर्ज बढ़ता जाता है। जो लोग गांजा का नशा करते हैं, उनमें बीमारी ज्यादा होती है।
केस-एक
पचकुइयां में रहने वाले करीब 26 वर्ष के युवक को परिजन बांधकर ओपीडी में लेकर आए। वह न सिर्फ अकेले बातचीत कर रहा था, बल्कि नींद पूरी न होने की वजह से उग्र हो गया। उसे भ्रम होने लगा कि परिवार के सदस्य उसके दुश्मन हैं। काउंसलिंग करने पर पता चला कि वह गांजा का काफी सेवन करता था और कुछ दिनों से नींद पूरी नहीं हो रही है। रोगी को भर्ती किया गया।
केस-दो
शहर के 30 वर्षीय युवक को लेकर परिजन आए। परिजनों ने बताया कि उसे खाना खाते समय कटोरे में आंख दिखाई देती है। वह चलते समय संतुलन नहीं बना पाता है। कभी कहता है कि उसे कोई खींच रहा तो कभी कहता है कि आत्मा निकल रही है। जब कोई टोकाटाकी करता है, तो उग्र हो जाता है। काउंसलिंग से पता चला कि वह भी गांजा का सेवन करता था और नींद पूरी नहीं करता था।