हवा में धूल कणों के कारण वायु प्रदूषित हो रही है। लगातार हो रहे अवैध खनन, निर्माण कार्य और दीपावली व अन्य अवसरों पर चलने वाले पटाखों के कारण वायु में धूल कणों का स्तर दो से पांच फीसदी बढ़ा है।
शहर में तेजी से दो व चार पहिया वाहनों की संख्या बढ़ रही है। निर्माण कार्य, खनन के लिए विस्फोट, समारोहों में आतिशबाजी और तेज आवाज में डीजे बजाने से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसे अभी नहीं रोका तो यह खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है। शहर के वातावरण में प्रदूषण का स्तर दीपावली में सामान्य दिनों की अपेक्षा तीन गुना तक हो जाता है। इस बार दीपावली पर पिछले वर्ष के 181.22 के मुकाबले वायुमंडल में 19.10 प्रति मिलीग्राम पर्टीकुलेट मैटर की बढ़ोत्तरी हुई है।
क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड निरंजन शर्मा का कहना है कि फिलहाल कि शहर में वायु प्रदूषण का स्तर दुरुस्त है। लेकिन, इस तरफ ध्यान जरूरी है। लोगों को जागरूक करना होगा। आतिशबाजी और ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग कम हो तो चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। दीपावली के मौके पर प्रदूषण विभाग ने इलाइट चौराहे पर एंबिएंट मानीटरिंग मशीन स्थापित कर वायु प्रदूषण में धूल के कणों का आकलन किया था। शिवाजी नगर स्थित बीपीसीएल आवासीय कालोनी में ध्वनि प्रदूषण के लिए मशीन लगाकर परीक्षण किया था।
ये रहे हालात
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वर्ष गणना का दिन वायु प्रदूषण ध्वनि प्रदूषण
2014 सामान्य दिन (15अक्तूबर) 64.45 (आरएसपीएम) 65.77
दीपावली के दिन (23 अक्तूबर) 247.40 75.07
2015 सामान्य दिन (5नवंबर) 64.95 57.08
दीपावली के दिन (11 नवंबर) 181.22 63.56
2016 सामान्य दिन (24 अक्तूबर) 66.76 57.57
दीपावली के दिन (30 अक्तूबर) 200.32 67.07
जिलाधिकारी ने बुलाई बैठक
प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार जिलाधिकारी अजय शुक्ला ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए विभिन्न विभागों की टास्क फोर्स की बैठक बृहस्पतिवार को बुलाई है। इसमें शहर में बढ़ रहे प्रदूषण की रोकथाम के उपायों और तरीकों पर चर्चा होगी।
सर्दियों में ज्यादा होता है प्रदूषण का प्रकोप
सर्र्दियों के मौसम में प्रदूषण का प्रकोप अधिक दिखता है क्योंकि ठंडी हवाएं प्रदूषण की गर्म हवाओं को खींच लेती हैं। सर्दियों में वातावरण ठंडा होने के कारण प्रदूषित कण उड़ नहीं पाते और कोहरे के कारण नीचे ही जमा हो जाते हैं।