गांव के हर घर की होगी पैमाइश सेटेलाइट एवं ड्रोन कैमरे की मदद से खींची जाएगी चौहद्दी झांसी। ग्रामीण इलाकों में रिहायशी इलाकों की भी अब सरकारी पैमाइश होगी। खतौनी की तर्ज पर घरों की चौहद्दियों के विवरण दस्तावेजों में दर्ज किए जाएंगे। इस काम में सेटेलाइट एवं ड्रोन कैमरों की मदद ली जाएगी। इस वर्ष के आखिरी तक इस काम के पूरा होने की उम्मीद है। गांवों में आबादी की जमीन को लेकर सर्वाधिक विवाद सामने आते हैं। पुख्ता कागजी सुबूत न होने से इनका निपटारा करने में भी परेशानी होती है। इससे स्टांप ड्यूटी में भी काफी नुकसान उठाना पड़ता है। इस अव्यवस्था को खत्म करने के लिए ग्रामीण इलाकों के आबादी वाले इलाके का भी शासन ने सर्वे कराने का निर्णय लिया। झांसी में कुछ माह के भीतर यह काम आरंभ होना है। अधिकारियों के मुताबिक इस काम में सेटेलाइट एवं ड्रोन कैमरों से पूरे गांव का सर्वे होगा। उससे मिली इमेज का ग्राम सभा के नक्शे से मिलान करके डेटा तैयार होगा। राजस्व विभाग के पास यह डेटा सुरक्षित रहेगा। सेटेलाइट मैपिंग के बाद इसमें प्रत्येक गाटा से संबंधित सभी जानकारियां दर्ज होंगी। इससे मालूम चल सकेगा कि कहां कितने क्षेत्रफल में किसका घर है। आबादी की जमीन में रास्ता, मुख्य मार्ग, संपर्क मार्ग कहां से है। उसकी लंबाई-चौड़ाई कितनी है। नाली कहां से बह रही है। ऐसे विवाद होने पर इनका निपटारा किया जा सकेगा साथ ही खरीद- बिक्री के लेकर पैदा होने वाले विवाद भी खत्म किए जा सकेंगे। इसकी मदद से स्टांप चोरी में भी अंकुश लग सकेगा। सर्वेक्षण विभाग, राजस्व एवं पंचायती राज विभाग मिलकर इस काम को करेंगे। डीपीआरओ जगदीश राम के मुताबिक जल्द ही इस दिशा में काम शुरू होगा। इनसेट बड़ागांव ब्लॉक से शुरू होगा काम सर्वेक्षण का यह काम बड़ागांव ब्लॉक के गांवों से शुरू करने की योजना है। इसके तहत पहले चार-चार गांव चुने जाएंगे। सर्वे के बाद सभी को क्षेत्रफल एवं उसके मालिकाना संबंधी स्वामित्व प्रमाण पत्र दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इन गांवों को चुने जाने का काम कराया जा रहा है। इनके चयन के साथ ही यहां काम शुरू कराया जाएगा।