मनरेगा: 2.17 लाख ने नहीं मांगा काम झांसी। महामारी के समय प्रवासी श्रमिकों के लिए भले मनरेगा संजीवनी बनी जनपद में पंजीकृत श्रमिकों में 2.17 लाख श्रमिक ऐसे भी सामने आए हैं जिन्होंने जॉबकॉर्ड बनवाया लेकिन मनरेगा के तहत काम ही नहीं मांगा। संभावना जताई जा रही कि इनमें प्रवासी मजदूरों की तादात भी बड़े पैमाने पर है, जो अब धीम-धीमे अब फिर वापस जाने लगे हैं। लॉकडॉउन के दौरान अप्रैल एवं मार्च माह में दूसरे प्रदेशों में काम करने वाले हजारों कामगार अपने गांव वापस लौट आए। सरकारी आकड़ों के मुताबिक यहां कुल 34,400 कागगार लौटे। इनमें से 21 हजार निर्माण श्रमिक थे। इन सभी का मनरेगा के जरिए जॉबकॉर्ड बनाया गया। जिससे इसकी बढ़कर 1.97 लाख हो गई। इनके जरिए कुल 3.79 लाख श्रमिकों को रोजगार दिया जाना था लेकिन, मौजूदा समय में सिर्फ 1.04 जॉबकॉर्ड ही सक्रिय हैं और सिर्फ 1.62 लाख लोगों ने ही काम करने में दिलचस्पी दिखाई। शेष 2.17 लाख मजदूरों ने इससे दूरी बनाए रखी। आकड़ों के मुताबिक नए जॉबकार्ड में करीब 45 फीसदी ने काम नहीं किया। अफसरों का भी कहना है कि उद्योगों के खुलने के साथ ही श्रमिक वापस लौटने लगे हैं लेकिन, कोई भी इस बारे में खुलकर बोलने को राजी नहीं है। कुछ दिनों बाद बारिश आरंभ हो जाने से भी मनरेगा का काम ठप हो जाएगा। इसको देखते हुए भी तमाम श्रमिक वापस उद्योगों की ओर लौट रहे हैं। बता दें, सरकार ने श्रमिकों की वापसी को गंभीरता से लेते हुए उनको रोकने के लिए गांव में ही रोजगारों के सृजन का निर्देश दिया हुआ है। 00000 मंडल में करीब तीन लाख जॉबकॉर्ड बनवाए गए लेकिन, 70 फीसद ने मनरेगा में काम नहीं किया। इनमें से 15-17 प्रतिशत लोग उद्योग चालू होने पर वापस काम पर चले गए हैं। सुभाष चंद्र शर्मा