झांसी। महानगर में होली का उल्लास दिखने लगा है। घरों में मेहमानों के लिए कई पकवान बनाए जा रहे हैं। अलग-अलग समाजों में भी होली के उत्सव को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। मेहमानों के स्वागत के लिए मीठी गुझिया, नमकीन पपड़ियों के साथ ही श्रीखंड, घीयर, संदेश, रसोगुल्ला और मीठा दही तैयार किया जाएगा। महाराष्ट्रीय, बंगाली, राजस्थानी, सिंधी सहित अन्य सभी समाजों में परंपरा के अनुसार रंगोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।
बंगाली समाज : मीठे दही और पकवान से होता है मेहमानों का स्वागत
बंगाली समाज में फाल्गुन पूर्णिमा (दोलरात्रा पूर्णिमा) पर लोग रात में अपने घरों में पूजा करते हैं। मां दुर्गा एवं राधा-कृष्ण की भक्ति की जाती है। घर के बडे़-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने के बाद होली खेली जाती है। टेसू, गेंदा, चंपा, चमेली आदि फूलों से रंग तैयार किया जाता है। घरों में संदेश, रसोगुल्ला, मीठा दही आदि पकवान बनाए जाते हैं। इससे मेहमानों का स्वागत किया जाता है।
प्रदीप मुखर्जी
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महाराष्ट्रीयन समाज : महाराजा गंगाधर राव की समाधि पर करते हैं पुष्पाजंलि
महानगर का महाराष्ट्र समाज बुंदेलखंड की परंपराओं के अनुसार होली खेलता है। वहीं, समाज के सदस्य होली की पड़वा पर महाराजा गंगाधर राव की समाधि पर जाकर पुष्पाजंलि अर्पित करते हैं। इसके अगले दिन होली खेली जाती है। मेहमानों के स्वागत के लिए घरों में श्रीखंड, पूरणपोली आदि पकवान बनाए जाते हैं। रंगपंचमी से पहले गणेश मंदिर में होली मिलन कार्यक्रम होता है।
गजानन खानवलकर
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सिंधी समाज : रोटी पर धागा बांधकर होलिका की अग्नि में सेंकते हैं
होली पर गुड़ व आटे से रोटी बनाई जाती है, इसे रोट कहा जाता है। इस पर धागा बांधा जाता है और होलिका की अग्नि में सेंका जाता है। रोटी तो सिक जाती है, लेकिन धागा नहीं जलता है। इस बार पूज्य सिंधी पंचायत भवन शहर में नौ मार्च को होली मिलन कार्यक्रम होगा। वहीं, घरों में बड़े आकार की जलेबी (घीयर) बनाई जाती है। साथ ही अन्य पकवान भी बनते हैं।
चंद्रप्रकाश नैनवानी
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राजस्थानी समाज : ठंडी होली की पूजा करती हैं महिलाएं
राजस्थानी समाज में होली व्यापक उत्साह से मनाई जाती है। परंपरागत परिधान पहनकर महिलाएं ठंडी होली की पूजा करती हैं। इसके बाद सभी लोग खूब होली खेलते हैं और एक दूसरे को गुलाल अबीर के साथ चंदन व इत्र भी लगाते हैं। रंग पर्व पर घरों में रस भरी गुझिया, दाल बाटी एवं लड्डू सहित कई पकवान बनाए जाते हैं।
दिलीप अग्रवाल
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बुंदेलखंड : होलिका दहन में अर्पित करते हैं नए अनाज की बालियां
बुंदेलखंड में रंग पंचमी तक रंगोत्सव मनाया जाता है। होलिका दहन में नए अनाज की बालियां अर्पित की जाती हैं। मंदिरों में फूलों की भव्य होली खेली जाती है। महाराजा गंगाधर राव के समय में किले पर होली का भव्य उत्सव होता था। वहीं, पर्व पर घरों में मैदा, बेसन से कई मीठे व नमकीन पकवान बनाए जाते हैं।
मधु श्रीवास्तव
पूर्वांचल : होती है कुर्ता फाड़ होली, मालपुआ से करते हैं स्वागत
बिहार एवं पूर्वांचल के परिवारों में होली जमकर मनाई जाती है। इसे कुर्ता फाड़ होली भी कहते हैं। होलिका दहन में गेहूं की नई बाली एवं प्रसाद अर्पण किया जाता है। पर्व पर दही बडे़ एवं मालपुआ मुख्य पकवान हैं। होली की तैयारियां सभी घरों में लगभग हो चुकी हैं।
डा. सरिता राय