संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईएस) पिछले दो साल से सात सड़कों का निर्माण पूरा नहीं कर सका जबकि इन सड़कों के निर्माण में विदेश से मंगवाई गई मशीन की भी मदद ली जा रही है। दो साल बीतने के बाद भी कई सड़कों का निर्माण महज दस फीसदी ही हो सका है। अभियंताओं का कहना एफडीआर तकनीक के इस्तेमाल की वजह से काम अब तक पूरा नहीं हो सका। अब यह काम तेजी से कराया जाएगा।
वर्ष 2022 में आरईएस को 60.90 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण के लिए 64.71 करोड़ रुपये दिए गए थे। इस प्रोजेक्ट के तहत सड़कों को फुल डेफ्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) तकनीक से बनाना था। इस तकनीक से सड़क बनाने में विदेशी मशीनों का इस्तेमाल होता है। आरईएस ने दो साल पहले ही इनका निर्माण शुरू कराया लेकिन, अभी तक काम पूरा नहीं हो सका। आरईएस अभियंताओं का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के तहत गुरसराय ब्लॉक में पंडवाड़ा से बिजना तक 17.23 करोड़ की लागत से 16.70 किलोमीटर, बामौर ब्लॉक में अतरसुवा के बीच 6.49 करोड़ की लागत से 6.60 किलोमीटर लंबी सड़क, गरौठा खुर्द से वोहना तक 5.62 करोड़ की लागत से 4.70 किलोमीटर सड़क, बंगरा ब्लॉक में 5.62 करोड़ की लागत से 6 किलोमीटर सड़क, मऊरानीपुर ब्लॉक में 16.32 करोड़ की लागत से 15.60 किलोमीटर लंबी सड़क, बामौर ब्लॉक में 6.63 करोड़ की लागत से 6 किलोमीटर लंबी सड़क और गुरसराय ब्लॉक में 6.63 करोड़ की लागत से 5.30 किलोमीटर सड़क बनाई जानी थी लेकिन, अभी सिर्फ पंडवाड़ा से बिजना के बीच 16.70 किलोमीटर एवं टोडी फतेहपुर में 65 फीसदी निर्माण कार्य हो सका है। अन्य सड़कों का निर्माण महज दस फीसदी ही हो सका।
वर्जन
पंडवाड़ा से बिजना तक सड़क निर्माण कार्य पूरा कर लिया है। हालांकि, अभी इस पर पेंटिंग का कार्य होना बाकी है। मौसम में गर्मी आते ही यह कार्य भी कर लिया जाएगा। अन्य सड़कों पर भी काम तेजी से कर रहे हैं और मार्च तक इसे पूरा कर लिया जाएगा।
रजनीश कुमार, अधिशासी अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग