झांसी। पेयजल एवं सिंचाई का रकबा बढ़ाने के इरादे के साथ शुरू हुई महत्वाकांक्षी एरच बांध परियोजना जांच के गलियारों में ही भटक कर रह गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस परियोजना का काम जल्द आरंभ कराने का भरोसा दे चुके, लेकिन उसके डेढ़ साल बाद भी स्थिति जस की तस है। नए वित्तीय वर्ष में इस काम के आरंभ होने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
पारीछा बांध से करीब चालीस किलोमीटर नीचे एरच के जुझार गांव में वर्ष 2015 में अखिलेश यादव के कार्यकाल में 610 करोड़ की लागत से इस बांध परियोजना का काम आरंभ हुआ था। करीब 19 मीटर ऊंचा एवं 1400 मीटर लंबाई में बनने वाले इस बांध में 62 एमसीएम पानी भरा जाना था। इसमें 29 एमसीएम पीने के पानी के लिए एवं 950 एमसीएम पानी सिंचाई के लिए रखा जाना था। वर्ष 2018 तक 401 करोड़ रुपये परियोजना पर खर्च कर दिए गए, लेकिन डिजाइन समेत अन्य गड़बड़ियों के चलते परियोजना सवालों के घेरे में आ गई। वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लगे। योगी सरकार ने इन आरोपों के चलते काम बंद कराके ईडब्ल्यूएस जांच के निर्देश दिए। इसके बाद से परियोजना ठप्प पड़ी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 2019, दिसंबर में जब झांसी आए तब उन्होंने जांच निपटाकर जल्द परियोेजना शुरू कराने का भरोसा दिलाया था लेकिन, इसके बावजूद यहां काम अब तक शुरू नहीं हो सका है। सिंचाई विभाग के आला अफसर भी इस बारे में कुछ बोलने को राजी नहीं हो रहे।
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साढ़े सोलह करोड़ रुपये के घपले की आशंका
झांसी। बांध निर्माण के दौरान नीचे से निकले पत्थरों को बिना टेंडर कराए मनमाने दाम पर बेच दिए गए। इसकी जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा से कराई गई। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक जांच में करीब साढ़े सोलह करोड़ रुपये की गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। जांच रिपोर्ट में माना गया कि खोदाई में निकले पत्थरों की नीलामी नहीं कराई गई। तत्कालीन अभियंताओं ने इस खनिज को मनमाने तरीके से खुद ही बेच दिया। जांच में सामने आया कि जिस खनिज की कीमत उस दौरान सवा दो सौ रुपये थी उसे आधी से भी कम कीमत पर चहेतों ठेकेदारों को दे दिया गया। यह रिपोर्ट शासन के पास है। इसमें एक एसई, दो एक्सईएन, सात एई एवं छह जेई पर कुल साढ़े 16 करोड़ रुपये के घपले की बात कही गई है।