आवारा कुत्तों पर नकेल डालने का काम शुरू हो गया है। उन्हें पकड़कर उनकी नसबंदी की जा रही है। साथ ही उन्हें एंटीरेबीज वैक्सीन भी लगाई जा रही है ताकि उनके काटे का असर न हो। रोज औसत 20 कुत्तों की नसबंदी की जा रही है। अब यदि यह अभियान लगातार चला तो आवारा कुत्तों से किसी हद तक राहत मिल सकती है।
शहर की मुख्य मार्ग ही नहीं, अस्पतालों और गलियों में भी आवारा कुत्तों का आतंक है। रोज न जाने कितने लोग इनका शिकार बनते हैं। कुछ की तो जान ही चली गई। अमर उजाला ने आवारा कुत्तों और छुट्टा जानवरों के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। इसका असर यह हुआ कि छुट्टा जानवरों के लिए बिजौली में कांजी हाउस का निर्माण हो रहा है। इसके बाद अब आवारा कुत्तों पर भी नकेल कसने का अभियान नगर निगम ने शुरू कर दिया है।
इसके लिए छत्तीसगढ़ के रायपुर की एनीमल केयर फाउंडेशन कंपनी से अनुबंध किया गया है। इस कंपनी ने बिजौली स्थित नगर निगम के भवन में नसबंदी के आपरेशन के लिए कक्ष बनाया है। आवारा कुत्तों को पकड़कर यहां लाया जाता है और उनकी नसबंदी की जाती है। साथ ही एंटीरेबीज वैक्सीन का डोज भी दिया जाता है। इसके बाद न तो ये कुत्तों की आबादी बढ़ा देने लायक बचते हैं और न ही इनके काटे का किसी को असर होता है। आपरेशन के पहले कुत्ते को बेहोश किया जाता है और फिर नसबंदी की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया में 15-20 मिनट लगते हैं।
इन इलाकों में पकड़े गए
आवारा कुत्ते पकड़ने का अभियान सबसे पहले जिला अस्पताल से शुरू किया गया। इसके बाद जजेज कंपाउंड, शिवाजी नगर, जर्मनी अस्पताल क्षेत्र, रायगंज, बस स्टैंड, इलाइट और तालपुरा क्षेत्र से कुत्ते पकड़े गए और उनकी नसबंदी की गई। अब नगर निगम कार्यालय के आसपास, इलाइट चौराहा और आसपास, कीकेडी चौराहा और आसपास अभियान चल रहा है।
साल में दो बार पैदा होते हैं बच्चे
कुत्तों का प्रजनन काल एक साल में दो बार आता है। गर्भधारण के 56 से 69 दिन के भीतर प्रसव हो जाता है। एक कुतिया एक बार में आठ से दस बच्चों को जन्म देती है। इस तरह एक साल में 20 बच्चे तक पैदा कर सकती है।
नहीं है आवारा कुत्तों का आंकड़ा
नगर निगम के पास ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है, जिससे पता चले कि महानगर में कितने कुत्ते हैं। लेकिन एक अनुमान के मुताबिक दस हजार से अधिक कुत्ते घूमते रहते हैं।
यहां ज्यादा हैं
आवारा कुत्ते मांस की दुकानों, होटलों, रेस्टोरेंटों और खानपान के ठेलों के पास ज्यादा मंडराते दिखते हैं। इनमें ज्यादातर आवारा होते हैं।
गर्मियों करते हैं ज्यादा हमले
तापमान बढ़ने पर कुत्ते ज्यादा हमलावर होते हैं। इनदिनों जिला अस्पताल में कुत्ता काटने के रोज औसत पांच मामले आ रहे हैं। गर्मी में यह संख्या 80 तक पहुंच जाती है।
यहां करें शिकायत
आवारा कुत्तों की सूचना नगर निगम में लिखित रूप से दर्ज करवा सकते हैं। इसके लिए पशु चिकित्साधिकारी को लिखकर दें।
आठ कुत्ते पकड़े गए
वार्ड नंबर 12 (बस स्टैंड क्षेत्र) में आवारा कुत्ते बहुत थे। इसकी शिकायत की गई तो नगर निगम ने टीम भेजी और आठ कुत्ते पकड़कर ले गई।
- आनंद साहू, पार्षद
लगातार चलेगा अभियान
आवारा कुत्तों को पकड़कर नसबंदी कराई जा रही है। जयपुर और दिल्ली की तर्ज पर आवारा कुत्ताें को पकड़ने का अभियान लगातार चलाया जाएगा। इसका असर भी दिख रहा है। कोई भी व्यक्ति आवारा कुत्तों की सूचना नगर निगम में दे सकता है। कार्रवाई जरूर होगी।
- डा. आरके निरंजन
पशु चिकित्साधिकारी, नगर निगम