झांसी। दो दिन पूर्व हटाए गए अतिक्रमण ने फिर अपनी जगह बना ली है। एक बार फिर नगर निगम ने पलट कर नहीं देखा। फुटपाथी दुकान व हाथ ठेलों पर सामान बेचने वालों ने खाली जगह पर अपना कब्जा कर लिया है। स्मार्ट सिटी की कतार में शामिल झांसी महानगर को इस अतिक्रमण रूपी दानव से आखिर मुक्ति कैसे मिल सकेगी? इसका ठोस जवाब अधिकारियों के पास भी नहीं है।
नगर निगम ने बुधवार को मंडी से नारायण बाग गेट तक अतिक्रमण हटाया था। कई स्थानों पर अवैध निर्माण ढहाए गए और कब्जाधारियों को खदेड़ा गया था। नतीजा, बुधवार को उक्त सड़क चौड़ी दिखाई देने लगी थी। नगर निगम की जेसीबी और अधिकारियों ने जैसे ही इस मार्ग से मुंह मोड़ा, एक बार फिर अतिक्रमण पसर गया। मंडी के पास ही खदेड़े गए लगभग एक सैकड़ा हाथ ठेले वाले एवं फुटपाथी दुकानदार दूसरे दिन ही अपनी निर्धारित जगह पर जम गए, उनका व्यापार ज्यों का त्यों चलने लगा। नगर निगम का कहना है कि अभियान लगातार चलेगा।
चार जोन में विभाजित हैं फुटपाथी व्यापार
झांसी। नगर निगम नियमावली के अनुसार इस फुटपाथी व्यापार को चार जोन में बांटा गया है।
1. नो वेडिंग जोन- इसके तहत कोई भी ठेला, खोखा व अस्थायी दुकान नहीं लगाई जा सकती है। मंडी परिसर के आसपास का स्थान नो वेडिंग जोन के अंतर्गत आता है। इन हाथ ठेले व फुटपाथी दुकानदारों को पंजीकरण के बाद व्यापार के लिए जगह दी जाती है, मगर ये लेने को तैयार नहीं हैं।
2. वेडिंग जोन- इसके अंतर्गत किसी भी सरकारी भवन, सरकारी कार्यालय या सार्वजनिक स्थान पर हाथ ठेला, खोखा लगाए जाने की अनुमति तब दी जा सकती है, जब संबंधित फुटपाथी व्यापारी अपना रजिस्ट्रेशन नगर निगम में करा ले।
3. मोबाइल वेडिंग जोन- इसमें नगर निगम में रजिस्ट्रेशन कराने के बाद हाथ ठेले अथवा अन्य संसाधनों से फेरी लगाने वालों को एक निर्धारित स्थान तक घूम-घूम कर व्यापार करने की अनुमति दी जाती है।
4. प्रतिबंधित वेडिंग जोन- इस जोन में फुटपाथी व्यापार करने वाले दुकानदार को एक निश्चित जगह दी जाती है, जिस पर वह अपनी दुकान लगाकर व्यापार कर सकता है। यदि वहां से उसने अन्यत्र अपना व्यापार किया तो उसके खिलाफ कार्रवाई होती है।
‘अतिक्रमणकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नगर निगम तभी कर सकता है, जब वह नगर निगम में पंजीकृत हों। फिलहाल नगर निगम में मात्र 137 पंजीकरण हैं। चार प्रकार के जोन के लिए इन हाथ ठेले वालों व अस्थायी खोखे रखने वालों को पंजीकृ तकरने का प्रयास किया जा रहा है, मगर कोई भी शुल्क देने को तैयार नहीं है। उन्होंने बताया कि उनके पास लगभग 2500 स्थान चिह्नित हैं, जहां पंजीकरण के बाद ये छोटे फुटपाथी व्यापारी अपनी दुकानें चला सकते हैं। ’
अपर नगर आयुक्त
नगर निगम
रोहन सिंह