नवविकसित कालोनियों में बिजली कनेक्शन के लिए नियम सरल किए जाएंगे, ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के मुताबिक 2018 तक हर घर में रोशनी की जा सके। जिस जगह तीन लोग एकसाथ कनेक्शन लेंगे, वहां तक एक खंभा बढ़ा दिया जाएगा। समस्या का हल निकालने का यह पहला तरीका होगा। इसके बाद भी बात नहीं बनी तो कनेक्शन लेने वालों से थोड़ा- बहुत पैसा जमा कराके उस क्षेत्र को रोशन किया जाएगा।
अगर कोई बिल्डर या कोलोनाइजर कालोनी विकसित करता है तो वहां के विद्युतीकरण की जिम्मेदारी भी उसी की होती है। इसी शर्त पर बिजली विभाग वहां बिजली सप्लाई करता है। मगर, बिल्डर और कोलोनाइजर प्लाट बेच देते हैं और कालोनी का विद्युतीकरण कराके नहीं देते हैं। बाद में कनेक्शन के लिए उन लोगों को भटकना पड़ता है, जो अपने घर बना लेते हैं। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए विद्युत विभाग ने नवविकसित कालोनियों के लिए नया नियम बना रखा है। इसके तहत अगर किसी कोलोनाइजर की ओर से विकसित किसी कालोनी के दस फीसदी उपभोक्ता एकसाथ बिजली कनेक्शन के आवेदन करेंगे तो वहां विद्युतीकरण के लिए इस्टीमेट बना दिया जाएगा। इसके साथ पचास फीसदी उपभोक्ता 35 रुपये प्रति वर्ग फुट के हिसाब से पैसा जमा कर दें तो वहां विद्युतीकरण करवा दिया जाएगा और बिजली कनेक्शन भी दे दिए जाएंगे। लेकिन, लोगों के लिए ऐसा करना भी संभव नहीं हो पा रहा है।
दूसरी शर्त यह है कि खंभे से चालीस मीटर दूर है, तो एकसाथ तीन लोगों के आवेदन करने पर उन्हें बिजली कनेक्शन दे दिया जाएगा। तब बीच में एक खंभा और तार भी बिजली विभाग लगाएगा। हालांकि, विभाग की इन दोनों शर्तों के बाद भी जरूरतमंद लोग कनेक्शन नहीं लगवा पा रहे हैं। इस कारण या तो अस्थायी कनेक्शन लेकर या कटिया डालकर दूर- दूर से लोग केबिल डालकर बिजली जला रहे हैं। चूंकि, प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सौभाग्य’ योजना के तहत घर- घर पहुंचाने की घोषणा कर दी हैं। इस कारण विभाग ने अब कनेक्शन देने में नरमी दिखाने का फैसला लिया है।
‘तीन लोग अगर एक साथ कनेक्शन लेते हैं तो एक खंभा बढ़ाने की योजना पर तुरंत का होगा। साथ ही अगर इसके बाद भी हल नहीं निकलता है तो विभाग कोई न कोई रास्ता जरूर निकालेगा। अगर, कनेक्शन देने में जेई या दूसरे स्तर पर कोई आना- कानी की जा रही है तो लोग सीधा उनसे आकर मिल सकते हैं।’
राकेश वर्मा, अधीक्षण अभियंता (महानगर)।
सात और गांवों की बिजली काटी
बिजली कटने के चार दिन बाद भी 31 गांवों का कोई भी व्यक्ति बिल जमा करने के लिए आगे नहीं आया। जबकि, सात गांवों की बिजली और काट दी गई हैं। वहीं, बिजली अधिकारियों का कहना है कि गांव में जिनके घर में बाइक हैं वे तो बिजली का बिल भरने में सक्षम होंगे ही। कम से कम वे ही आकर बिल जमा कर दें। सिफारिश के जरूर फोन बराबर आ रहे हैं।
विगत 22 सितंबर को 60 लाख रुपये से ज्यादा बकाया होने पर 31 गांवों की बिजली काट दी गई। इन गांवों में इक्का दुक्का उपभोक्ता ही बिल जमा कर रहे थे। कनेक्शन भी गांव में बीस प्रतिशत लोगों ने ले रखा है। वहीं, मंगलवार को मऊरानीपुर क्षेत्र के नया गांव, बरुआ माफ, लधेरा, विजयगढ़, तकतिया समेत सात गांवों की बिजली और काट दी गई। इस संबंध में अधीक्षण अभियंता (ग्रामीण) संदीप अग्रवाल ने कहा कि अभी तक एक भी गांव वाला बिल जमा करने के लिए सामने नहीं है। सिफारिश के फोन जरूर आ रहे हैं। कोई नवरात्र की बात कह रहा है तो कोई बिजली काटने से पहले नोटिस क्यों नहीं दिया गया? पूछ रहा है। मगर, कोई बिल जमा करने की बात नहीं कर रहा है। मोबाइल पर अभद्र भाषा का भी लोग प्रयोग कर रहे हैं। जब तक उपभोक्ता बिल जमा करेंगे, तभी गांवों की बिजली जोड़ी जाएगी।
इन गांवों में अंधेरा
बड़ागांव, बरुआसागर और बबीना क्षेत्र में स्थित दानीपुरा, डगरवाहा रक्सा, टोल बराठा, धरमपुरा, नर्सरी, महुआ खेरा, अहरौली, अटा, दबियापुरा, शहजोनी, छिपौटा, रसीना, सिमरिया, बगरुआ, शुकुवा, चंदोली, ठकुरपुरा, थिरकन, लहर तथा मऊरानीपुर क्षेत्र के भटा, नगैच, कुइया खिरक, अड़जार, पछवई, रोनी, सिगरवारा, बुडिया, विजवारा, कटौरा, सितौरा, झबरा शामिल हैं।