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बिजली उपभोक्ताओं पर बढ़ी 26 करोड़ की उधारी

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lलॉकडाउन के चलते महानगर के बिजली उपभोक्ताओं में 25 प्रतिशत ने ही बिल जमा किया। इस कारण विभाग को अप्रैल में 10 करोड़ ही राजस्व मिल सका। वैसे आम महीनों में विभाग को 35 से 36 करोड़ राजस्व मिलता है। इससे उपभोक्ताओं पर बकायेदारी बढ़ती जा रही है। हालांकि, विभाग ने मार्च से मई तक का बिल जमा करने के लिए इसी महीने की 31 तारीख तक का वक्त दिया है। इस अवधि में कोई विलंब शुल्क नहीं लिया जाएगा। महानगर के 16 सबस्टेशनों से 1.17 लाख उपभोक्ता जुड़े हैं। इन उपभोक्ताओं को तीन वितरण खंडों में बांटा गया है। यह उपभोक्ता हर महीने 40 करोड़ की बिजली जलाते हैं। बदले में विभाग को 35 से 36 करोड़ रुपये मिलते हैं। बाकी राशि उपभोक्ताओं पर बकाये के रूप में चलती रहती है। लॉकडाउन के कारण अप्रैल में मीटर रीडरों पर घर- घर जाकर बिल बनाने पर रोक लगा दी गई थी। इस अवधि में उपभोक्ताओं को मोबाइल पर मेसेज व ऑनलाइन तीन माह का औसत बिल पहुंचाया गया। जब बिल सामान्य रूप से बनने लगेंगे, तब मीटर में आई यूनिटों को जमा बिल के हिसाब से समायोजित कर दिया जाएगा। मगर अप्रैल में 28 हजार उपभोक्ताओं ने ही अपने बिल जमा किए। इन उपभोक्ताओं से वितरण खंड में 3.68 करोड़, द्वितीय में 4.24 करोड़ व तृतीय में 2.63 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त हुआ। बिजली अफसर कम राजस्व मिलने से चिंतित हैं। घर- घर जाकर बिल बनाएंगे मीटर रीडर उत्तर पावर कारपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एम देवराज ने ओरेंज व ग्रीन जोन में आने वाले क्षेत्रों में बिल बनाने का कार्य मीटर रीडरों से कराने के निर्देश दिए हैं। रेड जोन के अंतर्गत आने वाले घरेलू व कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं की सूची तैयार कर प्रोविजनल बिलिंग की जाएगी। इस संबंध में अधीक्षण अभियंता (महानगर) एसआर गर्ग ने बताया कि 11 मई से घर-घर जाकर बिल बनाने का काम शुरू हो जाएगा। अभी ये है व्यवस्था अभी बिजली उपभोक्ता बिल की धनराशि का पता एसएमएस भेजकर कर सकते हैं। इसके लिए उपभोक्ता को मोबाइल पर नंबर 5616195 से बिल स्पेस अपना बिजली एकाउंट नंबर लिखकर भेजना है। विभाग एसएमएस के जरिये ही उपभोक्ता के पास तीन महीने का औसत बिल बनाकर भेज देता है। इस बिल को उपभोक्ता ऑनलाइन या काउंटर पर जाकर जमा कर सकते हैं। उपभोक्ता बिजली विभाग की वेबसाइट पर जाकर भी अपना बिल देख सकते हैं।
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