जल्द ही झांसी में चीनी मिट्टी से बिजली के इंसुलेटर और कटआउट बनाए जाएंगे। खुर्जा के वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के बाद यह निर्णय लिया गया। इसके लिए राजकीय चीनी पात्र विकास केंद्र कोछाभांवर में नौ प्लांट लगाए जाएंगे। जिलाधिकारी अजय कुमार शुक्ला ने इसकी रिपोर्ट तैयार कर उद्योग विभाग के निदेशक को भेज दी है। ये प्लांट लगने से पहले चरण में करीब एक हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।
महानगर के कोछाभांवर में चीनी पात्र उद्योग संचालित हैं। यहां पर दस शेड हैं, लेकिन सिर्फ एक शेड में ही काम हो रहा ह।ै इस कारण चीनी मिट्टी का उद्योग रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। इसको पुनर्जीवित करने के लिए खुर्जा के वैज्ञानिकों की टीम डा. एलके शर्मा के नेतृत्व में यहां आई थी। टीम ने रिपोर्ट में बताया कि ललितपुर जिला में सिलिका और मैग्नीशियम बहुतायत में पाया जाता है, इससे पॉटरी (चीनी मिट्टी) उद्योग सफल हो सकता है। इस पर जिला उद्योग केंद्र ने पॉटरी उद्यमियों से यहां पर उद्योग लगाने के लिए आवेदन मांगे। यहां पर उद्योग लगाने के लिए दस शेड हैं, जिसमें से एक काम कर रहा है और नौ खाली पड़े हैं। इस हिसाब से नौ शेड के लिए उद्यमियों ने 24 आवेदन किये। इनका इंटरव्यू हो गया है और इसमें से नौ पात्रों का चयन कर लिया गया। ये उद्यमी यहां उद्योग स्थापित करेंगे। इनमें चीनी मिट्टी से इंसुलेटर और कट आउट बनाए जाएंगे। इनकी सूची जिलाधिकारी ने उद्योग विभाग के निदेशक को भेज दी है।
इंसुलेटर व फायर ब्रिक्स बनेंगे
अभी बिजली विभाग में इंसुलेटर अमेरिका और अन्य देशों से आयात होते हैं। लेकिन, झांसी में इंसुलेटर बनने से बिजली विभाग को काफी आसानी से इंसुलेटर मिलने लगेंगे। इंसुलेटर और कटआउट की तरह चीनी मिट्टी और कांच के बर्तन तैयार करने के लिए फायर ब्रिक्स का इस्तेमाल किया जाता है। फायर ब्रिक्स से बनने वाली भट्टी एक बार जलने के बाद जलती ही रहती है और जलते-जलते ही नष्ट हो जाती है। इस भट्टी की ईंट विशेष प्रकार की सिलिका और मैग्नीशियम से मिलकर बनती है। कच्चा माल ललितपुर और झांसी में बहुतायत में पाया जाता है। अभी यह ब्रिक्स चेन्नई में तैयार होती हैं और आने जाने में भाड़ा अधिक लगने के कारण महंगी पड़ती हैं। इन भट्टियों का प्रयोग कांच के बर्तन बनाने में किया जाता है। कुल्हड़ और मटका उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।
उद्यमी का सपना होगा पूरा
1982 में कानपुर से विमलेश सचान नामक मामूली सा व्यक्ति रोजगार की तलाश में झांसी आया और पॉटरी उद्योग से जुड़ गया, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। फिर वह दिल्ली चला गया और सफल हो गया। आज वह अरबपति हैं। जब उन्हें पॉटरी उद्योग को पुनर्जीवित करने की जानकारी मिली तो वह भी इंटरव्यू देने आए और चुने गए। अब उनका सपना पूरा होने वाला है।
1,300 रुपये प्रतिमाह किराया मिलेगा
उद्योग विभाग को प्रति शेड 1,300 रुपये प्रतिमाह किराया मिलेगा। इससे विभाग की आय बढ़ जाएगी। क्योंकि, अभी यह शेड खाली पड़े होने के कारण विभाग को कोई आमदनी नहीं हो रही है। यहां आने के बाद उद्यमी क्लस्टर डेवलपमेंट स्कीम के तहत ग्रुप बनाएंगे। इसमें दस प्रतिशत उद्यमी लगाएगा और बाकी पैसा केंद्र सरकार से दिया जाएगा।
झांसी बड़ी मंडी बनेगा
उद्यमियों की सूची निदेशक के पास भेज दी गई है। बहुत जल्द इसे स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। यहां पर इंसुलेटर और फायर ब्रिक्स उद्योग शुरू होने से व्यापार बढ़ेगा तथा सासाराम, वाराणसी, इलाहाबाद, टीकमगढ़ और छतरपुर के बाद झांसी बड़ी मंडी बनेगा।
- सुधीर कुमार श्रीवास्तव
उपायुक्त, जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र