झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से आठ कॉलेजों की बीएड की संबद्धता अटक गई है। इन कॉलेजों के प्रबंधनों ने शासन का दरवाजा खटखटाते हुए प्रमुख सचिव से संबद्धता दिलाने की गुहार लगाई है, जिसपर शासन ने विश्वविद्यालय को नियमानुसार कार्रवाई का निर्देश दिया है।
शासन में उच्च शिक्षा के प्रमुख सचिव को लिखित में अवगत कराते हुए कॉलेज संचालकों ने बताया है कि एनसीटीई, जयपुर से बीएड पाठ्यक्रम सत्र 2015-17 की मान्यता लेने के बाद विश्वविद्यालय से संबद्धता हासिल करने के लिए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में आवेदन किया गया। इसके लिए बीयू ने सभी कालेजों से अलग-अलग निरीक्षण शुल्क चालीस हजार रुपये जमा कराकर निरीक्षण मंडल का गठन कराया। साथ ही महाविद्यालय का स्थलीय निरीक्षण कराकर निरीक्षण मंडल द्वारा संबद्धता हेतु संस्तुत आख्या निर्धारित तिथि 10 मई 2015 के पूर्व विश्वविद्यालय में जमा करा दी गई, लेकिन विश्वविद्यालय ने संबद्धता के लिए निर्धारित तिथि पर अपनी बैठक ही नहीं की। यही नहीं, कॉलेजों द्वारा संबद्धता के लिए किए गए आवेदन को यह कहकर खारिज कर दिया गया कि उन्होंने अपना कार्य समय पर पूरा नहीं किया और न ही संबद्धता शुल्क समय पर जमा किया।
जबकि संबद्धता के पहले इसका शुल्क जमा करने का कोई प्रावधान ही नहीं है। वहीं, कॉलेज संचालकों के मुताबिक एनसीटीई की पूर्व नियमावली के अनुसार मान्यता देने की अंतिम तिथि तीन मार्च 2015 थी एवं विश्वविद्यालय द्वारा संबद्धता की अंतिम तिथि 10 मई 2015 थी, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा एनसीटीई द्वारा मान्यता देने की तिथि बढ़ाकर 31 मई 2015 कर दी गई। साथ ही विश्वविद्यालय को भी आदेशित किया कि 31 मई 2015 तक प्राप्त मान्यता प्राप्त संस्थानों को नियमानुसार संबद्धता दें।
कॉलेज संचालकों की गुहार पर शासन में उच्च शिक्षा अनुभाग के संयुक्त सचिव डॉ. अश्वनी कुमार गोयल ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।