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आठ करोड़ की छोटी करेंसी बैंकों के खजानों में पड़ी है डंप

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चल नहीं रहे पांच दस रुपये के सिक्के। अमर उजाला
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झांसी। एक और दो रुपये के सिक्के तो काफी पहले ही चलन से बाहर हो चुके हैं। लेकिन अब पांच, दस के सिक्के और नोट भी लेने में लोग आनाकानी करने लगे हैं। इतना ही नहीं, ये करेंसी बैंकों के लिए भी परेशानी परेशानी का सबब बनी हुई है। हालात ये हैं कि बैंकों के खजाने पूरी तरह से भर चुके हैं। सिक्कों और दस के नोटों की गड्डियों के ढेर लगे हुए हैं। खजानों में नकदी रखने की जगह नहीं बची है। बैंकों को अलग से जगह की व्यवस्था करनी पड़ी है। बैंकों के खजानों में आठ करोड़ रुपये से अधिक की नकदी डंप पड़ी हुई है, जिसका कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है।
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एक और दो रुपये के सिक्के अब भी भारत सरकार की मुद्रा में शामिल हैं। लेकिन, सालों पहले ये चलन से बाहर हो चुके हैं। तमाम छोटे कारोबारियों, मंदिरों के पुजारियों व अन्य लोगों के पास ये सिक्के बोरों में भरे पड़े हैं। लेकिन, अब बाजार में इनकी कोई कीमत नहीं रह गई है। मूल्य से कम में भी कोई इन्हें लेने को तैयार नहीं है। बैंक भी इन्हें लेने से हाथ खड़े कर चुके हैं। अब संकट पांच और दस रुपये के सिक्कों व नोटों पर है। ये भी चलन से बाहर होते जा रहे हैं। बैंकों पर पहले ही भरमार होने की वजह से ग्राहकों से ये लिए नहीं जा रहे हैं। जबकि, ग्राहक भी बैंकों से ये करेंसी नहीं ले रहे हैं। कारोबारियों के पास पांच और दस रुपये के सिक्कों तथा दस रुपये के नोटों का ढेर बढ़ता जा रहा है। ऐसे में अब वे भी इन्हें लेने से आनाकानी करने लगे हैं।
बैंकों की भी हालत खराब है। भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के खजाना पूरी तरह से फुल हो गया है। यहां सिक्के और दस रुपये के नोटों के बोरों के ढेर लगे हुए हैं। स्थिति ये है कि खजाने में नकदी रखना तो दूर की बात पैर रखने तक को जगह नहीं बची है। यही स्थिति का सामना पंजाब नेशनल बैंक की चेस्ट ब्रांच को भी करना पड़ रहा है। इन दोनों ही बैंकों को नकदी रखने के लिए अलग से जगह की व्यवस्था करनी पड़ गई है।
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चेस्ट पूरी तरह से भरी पड़ी है। नकदी रखने में समस्या का सामना करना पड़ रहा है। ग्राहक जमा करने तो आते हैं, लेकिन लेने को कोई भी तैयार नहीं होता है। समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। समाधान नजर नहीं आ रहा। - राहुल, क्षेत्रीय प्रबंधक - भारतीय स्टेट बैंक
ग्राहक पांच, दस रुपये के सिक्के, नोट जमा तो करते हैं, लेकिन बैंक से ये नहीं लेते। बैंक का खजाना इन सिक्कों और नोटों से पूरी तरह से फुल हो चुका है। अब रखने को जगह नहीं बची है। ऐसे में समस्या बनी हुई है। - आर के वर्मा, वरिष्ठ प्रबंधक - पंजाब नेशनल बैंक
आरबीआई से मिल रहे, जमा नहीं हो रहे
झांसी। बैंकों को सौ, दौ सौ, पांच सौ, दो हजार रुपये की नई करेंसी उपलब्ध कराने के साथ भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों को छोटी नकदी भी उपलब्ध कराई जाती है। बैंक आरबीआई से मिलने वाली नई करेंसी खर्च नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि उनसे ग्राहक नहीं ले रहे हैं। इससे इनका स्टॉक और भी बढ़ता जा रहा है। चेस्ट ब्रांच अन्य ब्रांचों को छोटी करंसी उपलब्ध कराती हैं। लेकिन, वे भी लेने से हाथ खड़े करते हैं। दबाव में ले भी लेते हैं, तो ये नकदी उनके पास पड़ी रहती है।
भिखारी भी नहीं लेते
झांसी। एक और दो रुपये के सिक्कों की स्थिति तो ये है कि अब इन्हें भिखारियों ने भी लेना बंद कर दिया है। कई मंदिरों में भी ये बोरों में भरे पड़े हैं। एक हजार रुपये के ये सिक्के लोग पांच - छह सौ रुपये में भी बदलने को तैयार हैं, लेकिन कोई इन्हें लेने वाला नहीं है।
हजारों के एक और दो रुपये के सिक्के रखे हुए हैं, लेकिन अब कोई लेता नहीं है। बैंक भी नहीं ले रहे हैं। इससे इनकी कोई कीमत नहीं रह गई है। सरकार को इसमें दखल करनी चाहिए। - सत्येंद्र शर्मा, आईटीआई
छोटी करेंसी चलन से बाहर होने की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी का सामना छोटे कारोबारियों को करना पड़ रहा है। लेनदेन न होने की वजह से कारोबार बुरी तरह से प्रभावित है। - संजीव कुमार दुबे, गांधी रोड
भारत सरकार की मुद्रा में शामिल होने के बाद भी छोटी रकम के सिक्कों का लेनदेन बंद हो गया है। बैंक भी नहीं ले रहे हैं। ऐसे में सरकार को दखल करते हुए सख्त कदम उठाने चाहिए। - राजेश डब्बू, खत्रयाना
सबसे ज्यादा समस्या छोटे कारोबारियों को है, क्योंकि उनके पास आने वाले ग्राहक छोटी करेंसी ही लेकर आते हैं। ग्राहक देते तो हैं, परंतु लेते नहीं हैं। लेनदेन न करो तो बिक्री प्रभावित होती है। - निजाम हुसैन, नरिया बाजार
छोटी करेंसी को लेकर जो समस्या बनी हुई है, इन हालातों में सरकार को इन्हें बंद ही कर देना चाहिए या फिर बैंकों में अलग से काउंटर लगाकर इन्हें जमा किया जाना चाहिए। - नरेंद्र, आंतिया ताल
बैंक और कारोबारी कहते हैं बड़ा नोट लाओ। जबकि, सब्जी, फल वाले आदि बड़ा नोट लेने के बाद छोटी करेंसी ही थमा देते हैं। ऐसे में आम आदमी के पास उपलब्ध छोटी मुद्रा रद्दी समान होती जा रही है। - अरविंद निरंजन, दीनदयाल नगर
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