घर में ईद की नजाम पढ़ाते हाजी रज्जाक
या खुदा! बंदों पर रहम कर..., इंसानियत को महफूज रख..., दुनिया को महामारी से बचा... आमीन! सोमवार को ईद उल फितर के मौके पर मुस्लिमों के सिर पाक परवरदिगार के सजदे में झुके हुए थे और लबों पर थीं सभी की खुशहाली की दुआएं। ईदगाह खाली थे और मस्जिदों में सन्नाटा पसरा हुआ था। कोरोना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण के लिए सभी ने अपने-अपने घरों में नमाज अदा की। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए दूर से ही त्योहार की मुबारकबाद दी गईं। गले मिलने व आपसी मेलजोल से लोग बचे। घर में परिवार के लोगों के बीच ही सभी ने त्योहार मनाया।
मुस्लिम इलाकों की सड़कों और गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ था, लेकिन घरों की दहलीज के भीतर ईद उल फितर की रौनक सुबह से ही छाई हुई थी। दिन की शुरुआत नमाज अदा करने के साथ हुई और इसके बाद शुरू हो गया एकदूसरे को मुबारकबाद देने का सिलसिला। फोन कॉल, वीडियो कॉल व मेसेज के जरिये लोग एक दूसरे को ईद की मुबारकबाद देते नजर आए। ईद की दावतें हुईं, लेकिन ये घर - परिवार के लोगों के बीच ही सिमटी रहीं। बाहर से लोगों का आना जाना कम ही रहा। हालांकि, इसका सभी को मलाल था, लेकिन कोरोना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण के लिए ये जरूरी भी था, जिसका झांसी में सभी ने पालन किया। इस दरम्यान लोगों ने आसपास के जरूरतमंदों की भी भरपूर मदद की। उन्हें जरूरत की सामग्री उपलब्ध कराकर ईद की खुशियां साझा कीं।
घर में ईद पर आदाब अर्ज करता प्रोफेसर सिराज खान का परिवार।