संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। गायत्री परिवार की स्थानीय शाखा ने बृहस्पतिवार को नवरात्र पर भागवत कथा का आयोजन किया। चौथे दिन की कथा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और बाल लीलाओं का वर्णन किया गया।
मथुरा से आए कथा व्यास बालाजी रामायणी ने कंस के अत्याचार और श्रीकृष्ण के जन्म से धरती को मुक्ति मिलने की कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि कंस के अत्याचारों से धरती की रक्षा के लिए देवकी के अष्टम पुत्र के रूप में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को नंदोत्सव के रूप में मनाया। उन्होंने धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की महत्ता पर प्रकाश डाला।
कथा व्यास ने कहा कि कथा सुनने से अहंकार का नाश होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। कथा के माध्यम से भगवान की भक्ति और समर्पण का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा हमें सिखाती है कि हमें कर्म करना चाहिए, फल की इच्छा नहीं रखनी चाहिए। भगवान पर विश्वास रखना चाहिए।
छह अप्रैल को सुबह सात बजे से मानसिक जाप एवं प्रातः नौ बजे से 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ एवं समस्त संस्कार का कार्यक्रम गायत्री शक्तिपीठ पर आयोजित किया जाएगा। ट्रस्ट के मीडिया प्रभारी सावन कुमार असाटी ने बताया कि शक्ति पीठ पर नवरात्र पर प्रतिदिन सुबह 9 बजे से हवन व संस्कार किए जा रहे हैं।