झांसी। एनसीईआरटी की ओर से मंगलवार को राजकीय संग्रहालय में शिक्षा विशेषज्ञ, शोधकर्ताओं ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर मंथन किया। इस दौरान शिक्षा पद्धति को ज्ञान, योग्यता व रोजगार परक बनाने की बात कही। वहीं दिया कि नई शिक्षा नीति में सूचना प्रौद्योगिकी पद्धत्तियों को प्रोत्साहन देने समेत देशी ज्ञान एवं स्थानीय वातावरण को भी शामिल करने पर जोर दिया।
एक दिवसीय सेमीनार में मुख्य अतिथि एनसीईआरटी दिल्ली क ी डीन एकेडमिक प्रो. सरोज यादव ने कहा कि विद्यार्थियों की जरूरत बदल गई है। सभी को सामान शिक्षा मिले यह जरूरी है। वहीं जिस कार्य क्षेत्र से छात्र है, उसी आधार की शिक्षा प्रणाली से पढ़ाया जाना बेहतर होगा। प्रो. पवन सुधीर ने कहा कि प्राइमरी शिक्षा की गुणवत्ता विकसित हो। किताबें सुंदर व रूचिपूर्ण हों, विद्यालय में सुखद वातावरण हो तो बच्चों में स्वाभाविक रूप से शिक्षा के प्रति रुचि रहेगी। डॉ. रंजना अरोड़ा ने कहा कि व्यावसायिक शिक्षा का सुदृढ़ीकरण, परीक्षा पद्धतियों में सुधार जरूरी है। एनसीईआरटी उत्तर प्रदेश के जेडी अजय सिंह ने कहा कि विद्यालयों में कला शिक्षा बच्चे को प्रचुर अवसर प्रदान कराता है। सेमीनार में उप शिक्षा निदेशक माध्यमिक नीना उदैनिया, संयुक्त शिक्षा निदेशक मनोज कुमार द्विवेदी, बीएसए सर्वदानंद के अलावा जालौन, ललितपुर, कानपुर, फर्रुखाबाद, औरैया, इटावा, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, बांदा सहित 18 जिलों से आए शिक्षा विशेषज्ञों, प्रशिक्षु, शोधकर्ताओं, खंड शिक्षा अधिकारी, बीआरसी, पुरस्कृत शिक्षकों ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए। संचालन बरुआसागर डायट प्राचार्य डॉ. आदर्श कुमार त्रिपाठी ने किया। वहीं एनसीईआरटी के आगामी सेमीनार वाराणसी, मुजफ्फरपुर व लखनऊ में आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
थर्ड जेंडर को शिक्षा जरूरी
एनसीईआरटी दिल्ली क ी डीन एकेडमिक प्रो. संतोष यादव के मुताबिक शिक्षा नीति में भेदभाव नहीं होना चाहिए। थर्ड जेंडर को भी शिक्षा प्राप्ति के लिए प्रोत्साहन क ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में इन्हें शिक्षा ग्रहण के लिए पर्याप्त अवसर देने की जरूरत है।
इन बिंदुओं पर हुई चर्चा
- प्रारंभिक शिक्षा में अधिगम निष्कर्ष सुनिश्चित करना
- माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक शिक्षा की पहुंच का विस्तार
- व्यवसायिक शिक्षा का सुदृढ़ीकरण
- विद्यालय परीक्षा पद्धतियों का सुधारना
- गुणकारी शिक्षकों के लिए अध्यापक शिक्षा का पुनरोद्धार
- प्रौढ़ शिक्षा और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय शिक्षा पद्धतियों के माध्यम से महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति व अल्पसंख्यकों के अलावा ग्रामीण साक्षरता की गति को बढ़ाना।
- विद्यालय और प्रौढ़ शिक्षा में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी पद्धतियों का प्रोत्साहन, विद्यालय में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी पद्धतियों का प्रोत्साहन
- विद्यालय मानक, विद्यालय मूल्यांकन, विद्यालय प्रबंधन प्रणालियां
- समावेशी शिक्षा को समर्थ बनाना, बलिकाओं अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अल्पसंख्यकों और विशेष आवश्यकता समूह वाले बच्चों की शिक्षा
- भाषा का प्रोत्साहन