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कैंपस से लेकर खेत तक बनेगा इको सिस्टम, कृषि विवि की होगी भूमिका

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झांसी। आजाद भारत का पहला रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय बुंदेलखंड के किसानों की दिशा और दशा बदलने में मील का पत्थर साबित होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके वर्चुअल लोकार्पण के दौरान इच्छा जताई कि जानकारों को कृषि विश्वविद्यालय कैंपस से लेकर खेत तक इको सिस्टम बनाने पर काम करना चाहिए। इस पर विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा कि पीएम की कही बात का शत-प्रतिशत अनुपालन किया जाएगा।
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लोकार्पण कार्यक्रम में पीएम मोदी बोले कि स्थानीय ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस टेक्नोलॉजी, आधुनिक कृषि उपकरण को देश की कृषि में अधिक उपयोग में लाने के लिए युवा शोधार्थी, वैैैज्ञानिक समर्पित भाव से काम करें। रिसर्च का खेती से सीधा सरोकार हो। कैंपस से लेकर खेत तक कैंपस के जानकारों को परिस्थिति तंत्र बनाने के लिए और अधिक काम किया जाना चाहिए। इसमें विवि की बड़ी भूमिका है। कृषि से जुड़ी शिक्षा, प्रैक्टिकल को स्कूल स्तर तक ले जाना जरूरी है। गांव में स्कूल स्तर पर छात्रों को कृषि के बारे में जानकारी दी जाए। इसका एक फायदा होगा कि विद्यार्थियों की खेती से जुड़ी स्वाभाविक समझ को वैज्ञानिक तरीके से विस्तार किया जा सकेगा। वहीं, दूसरा फायदा होगा कि छात्र खेती से जुड़ी तकनीक, व्यापार, कारोबार की जानकारी अपने परिजनों को देंगे। इससे एग्रो इंटरप्राइज को भी बढ़ावा मिलेगा। मोदी ने कहा कि इसको लेकर नई शिक्षा नीति में अनेक जरूरी बदलाव किए गए हैं।
वहीं, कुलपति डॉ. अरविंद कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जो कहा है उसका शत-प्रतिशत अनुपालन किया जाएगा। विश्वविद्यालय अपने यहां के प्रैक्टिकल को किसानों के खेतों तक लेकर जाएगा। हमारी पूरी कोशिश है कि विभिन्न फसलों के उन्नत बीजों के जरिए किसानों की आय में बढ़ोतरी हो। इस दिशा में काफी प्रयास शुरू भी कर दिए गए हैं। इसके काफी सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं।
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