फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चिंता : 41 साल में औसतन 0.6 डिग्री बढ़ गई धरती की तपिश

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो



झांसी। यूपी राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट से स्पष्ट हुआ है कि वर्ष 1982 से 2023 तक झांसी में मई का औसत अधिकतम तापमान 0.6 डिग्री बढ़ गया है। इसका सबसे ज्यादा असर सब्जियों और फलों के उत्पादन पर पड़ता है। वहीं, दो साल पहले झांसी को अत्यधिक संवेदनशील लू जोन भी घोषित किया जा चुका है। विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन का असर बता रहे हैं।

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. स्मृति त्रिपाठी ने बताया कि भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी), आईसीएआर-सीआरआईडीए जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के आंकड़ों के अनुसार, बुंदेलखंड में गर्मियों के मौसम में तापमान में लगातार इजाफा हो रहा है। अप्रैल से जून के बीच अधिकतम तापमान अब सामान्यत: 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच रहा है। 2024 में तो दिन का तापमान 49 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। लू के दिनों में भी इजाफा देखने को मिला है।
विज्ञापन




झांसी में गर्मी के सीजन में हर साल औसतन आठ से 12 दिन अत्यधिक गर्म रहते हैं। पहले की तुलना में इसमें लगभग 30 फीसदी का इजाफा हुआ है। उन्होंने बताया कि 1982 में मई में झांसी का औसत तापमान 42.42 डिग्री था, जो 2023 में 45.9 डिग्री दर्ज किया गया। चूंकि, औसत तापमान में साल-दर-साल उतार-चढ़ाव बना रहता है। ऐसे में यूपी राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट में वर्ष 1982 से 2023 की अवधि में झांसी में औसत तापमान में 0.6 डिग्री सेल्सियस का इजाफा हुआ है।

उन्होंने बताया कि 2023 की आईएमडी की लू की रिपोर्ट में झांसी को अत्यधिक संवेदनशील लू जोन घोषित किया गया है। ऐसा 15 से अधिक दिनों तक अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के ऊपर बना रहने से हुआ है। पिछले साल की नासा के मॉडिस (मध्यम रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग स्पेक्ट्रोरेडियो मीटर) सेटेलाइट डाटा द्वारा विश्लेषण में भी झांसी क्षेत्र में भूमि सतह के तापमान में इजाफा और सतह की नमी में कमी दर्ज की गई है। इस तापमान वृद्धि का वनस्पति पर नकारात्मक प्रभाव देखा जा सकता है। उच्च तापमान के कारण मिट्टी की नमी तेजी से वाष्पित होती है। इससे वनस्पति की वृद्धि बाधित होती है। विशेष रूप से ग्रीष्म ऋतु में प्राकृतिक घास, झाड़ियां सूख जाती हैं। इससे पशुपालन को चारा संकट का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा वनों में पत्तियां झड़ने लगती हैं और वृक्षों की वृद्धि दर धीमी हो जाती है।
विज्ञापन




तापमान बढ़ने के ये हैं कारण



डॉ. स्मृति ने बताया कि झांसी समेत बुंदेलखंड में भौगोलिक विविधताएं हैं। यहां पत्थर के पहाड़ ज्यादा गर्म रहते हैं। कई जगहों पर बंजर जमीन है। ऐसे में बारिश के प्रतिशत में भी कमी आई है। झांसी में औसत वर्षा 876 मिलीमीटर है। मगर पिछले कई सालों में औसत बारिश 815.36 मिलीमीटर दर्ज हुई है। 2020 से 2025 तक औसत वर्षा में कमी आई है। 2024 में तो 745 मिलीमीटर ही बारिश हुई है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें