देश में शिक्षा के क्षेत्र में संसाधनों की कमी के कारण भारत जैसे विशाल देश में सभी के लिए शिक्षा प्रदान करना वास्तव में एक दुरूह और लगभग असंभव कार्य है। तकनीकी विकास के युग में ई-लर्निंग के द्वारा ही यह संभव हो सकता है कि देश के प्रत्येक नागरिक को शिक्षा प्रदान की जा सके। विश्वविद्यालय का प्रयास होगा कि बुंदेलखंड क्षेत्र में भी ई-लर्निंग से शिक्षा का प्रचार प्रसार किया जाए। यह बात कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन ने दो दिवसीय कार्यशाला में कही।
कार्यशाला के दूसरे दिन पहले सत्र में स्प्रेडशीट को एक सांख्यकीय टूल के रूप में किस प्रकार प्रयोग किया जा सकता है इस विषय पर मुख्य अतिथि प्रो. केबी भानुमति ने व्याख्यान दिया। उसके पश्चात उन्होंने रिसर्च राइटिंग टूल तथा उनके अनुप्रयेागों पर उदाहरणों सहित चर्चा की। दूसरे तकनीकी सत्र में डॉ. अरुण जुल्का ने शोध में प्लेगेरिज्म के तहत आने वाली विभिन्न सामग्रियों को चैक करने की कई विधियों को बताया तथा कॉपीराइट के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
उद्घाटन सत्र में नई दिल्ली के गुरू अंगद देव टीचिंग एंड लर्निंग सेंटर के उपाध्यक्ष प्रो. भानुमति ने इस दिशा में भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।