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ऐसी मालगाड़ियों में लगा दी ड्यूटी, जिनको जाना ही नहीं था

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अमर उजाला ने नौ अप्रैल के अपने अंक में प्रकाशित किया था कि लॉकडाउन के चलते 23 मार्च से मेल व पैसेंजर ट्रेनों का संचालन बंद चल रहा है। सिर्फ आवश्यक वस्तुओं को मालगाड़ी के जरिये एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम हो रहा है। इसमें कोयला, पेट्रोलियम, दूध, किराना आदि शामिल है। झांसी से भी प्रतिदिन 30 से 35 मालगाड़ी गुजर रहीं हैं। मालगाड़ी पर जाने के लिए 425 गार्ड लगे हैं। जबकि, मेल व पैसेंजर गार्ड घर पर हैं। वहीं, तीस ऐसे मालगाड़ी गार्ड हैं, जो अलग- अलग सिफारिशों के चलते ड्यूटी पर जाने से बच रहे हैं। इस खबर के प्रकाशित होने पर परिचालन विभाग हरकत में आ गया। मंडल या जोन के अधिकारी इस अव्यवस्था पर कोई सवाल खड़ा न करें। इस पर आनन- फानन में 12 गार्डों की ड्यूटी नौ अप्रैल को लगा दी गई। ये सभी वे सीनियर गार्ड हैं, जिनको जल्द ही पैसेंजर गार्ड के पद पर पदोन्नत किया जाना है। हालांकि, अभी वे मालगाड़ी ही चला रहे हैं। इन सभी की ड्यूटी पैसेंजर, मंगला, अंडमान व यूपी संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में अतिरिक्त गार्ड (स्पेयर) के रूप में ड्यूटी दिखा दी गई। सार में लिख दिया गया कि यह गाड़ियां नहीं चलीं। सभी का साइन ऑफ टाइम भी दोपहर तीन बजे से तीन बजकर बारह मिनट के बीच दिखा दिया गया। इस पर दूसरे गार्ड सवाल उठा रहे हैं कि जो गाड़ियां चल ही नहीं रहीं थीं तो उनमें ड्यूटी क्यों लगा दीं गईं। सिर्फ संबंधित गार्डों को लाइन ड्यूटी पर न जाना पड़े। इसलिए ऐसा किया गया। अब चार दिन बाद ही इन गार्डों की ड्यूटी लगानी पड़ेगी। तब तक लॉकडाउन खुलने की उम्मीद है। इससे दूसरे गार्डों में रोष है। वहीं, इस मामले में जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह बार- बार बयान बदलते रहे। उन्होंने आखिर में कहा कि रोस्टर के हिसाब से ही ड्यूटी लगाई गई।
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