झांसी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्वीकृति लिए बगैर अंधाधुंध निर्माण जारी हैं। स्थिति यह है कि पूरे जिले में केवल एक कॉलोनी निर्माण की ही बोर्ड से स्वीकृति ली गई है।
कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो रहे शहर में प्रदूषण की मात्रा खतरे के निशान से ऊपर है। शहर के व्यस्ततम बाजार हों या कम आवाजाही वाले इलाके, सभी स्थान प्रदूषण की चपेट में हैं। हवा में घुले धूल के कण लोगों को रोगी बना रहे हैं।
पर्यावरण की इस स्थिति के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा काफी हद तक शहर में हो रहे अंधाधुंध निर्माण कार्यों को जिम्मेदार माना जा रहा है। बावजूद, इस पर नियंत्रण के प्रभावी उपाय नहीं किए जा रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत निर्माण कार्य के लिए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्वीकृति लेना जरूरी है।
खासतौर पर यह स्वीकृति बड़े निर्माण मल्टी स्टोरी बिल्डिंग, कालोनी, व्यावसायिक कांपलेक्स आदि के लिए अनिवार्य है, ताकि संबंधित निर्माण कार्यों में प्रदूषण नियंत्रण के मानकों को लागू किया जा सके। लेकिन, इस नियम को ताक पर रखकर धड़ाधड़ निर्माण कार्य जारी हैं।
हालात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जिले में केवल एक कालोनी स्पेस मून सिटी की प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्वीकृति ली गई है। अन्य सभी निर्माणों में धूल के साथ नियमों को उड़ाया जा रहा है।
आंखें फेरे है बोर्ड
झांसी। पर्यावरण के साथ हो रहे खिलवाड़ की ओर से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी आंखें फेरे हुए है। पर्यावरण संरक्षण के नियमों को ताक पर रखकर बगैर स्वीकृति के हो रहे निर्माण कार्यों पर बोर्ड द्वारा किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे उक्त नियम कागजों में दबकर रह गया है। यहां तक कि तमाम लोगों को इसकी जानकारी तक नहीं है।
‘पर्यावरण संरक्षण के उपायों को लागू करने के लिए निर्माण कार्य की प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्वीकृति लेना आवश्यक है। लेकिन, जिले में यह अनुमति केवल एक कालोनी के लिए ही ली गई है। जल्द ही बगैर स्वीकृति के होने वाले निर्माण कार्यों पर कार्रवाई होगी।’
- के के श्रीवास्तव, क्षेत्रीय अधिकारी-प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड