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बालू निकालते समय खदान धंसी, तीन मजदूरों की मौत

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ओरछा/झांसी। मंगलवार की सुबह सात बजे औद्योगिक क्षेत्र प्रतापपुरा के नजदीक बेतवा नदी के घटवाहा घाट पर रेत की खदान धंसकने से दबकर तीन मजदूरों की मौत हो गई। घटना की जानकारी होने पर लोगों की भीड़ लग गई। रेत में दबे मजदूरों के शवों को बाहर निकाला गया। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने ट्वीट कर तीन मजदूरों की मौत पर दुख जताया है।
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मंगलवार सुबह 6 बजे घटवाहा निवासी चंद्रभान रैकवार का पुत्र संजय (18 ), वीरन का पुत्र पंकज रैकवार (20 ) और चतुर सिंह कुशवाहा का पुत्र
धर्मेंद्र कुशवाहा (19 वर्ष) अन्य मजदूरों के सात बेतवा नदी के किनारे ठाकुरदास प्रजापति के खेत पर स्थित खदान से दो ट्रैक्टर ट्राली लेकर बालू भरने के लिए गए थे। बालू निकालने के दौरान अचानक खदान धसक गई। रेत में संजय, पंकज रैकवार और धर्मेंद्र कुशवाहा दब गए। यह देख हड़कंप मच गया। सूचना पर परिवार के लोगों के साथ कई ग्रामीण वहां पहुंच गए। फावड़ों से रेत हटाई गई। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद रेत में दबे संजय, पंकज रैकवार और धर्मेंद्र कुशवाहा को बेहोशी हालत में बाहर निकाला गया। उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज झांसी लाया गया। यहां डाक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पुलिस ने मामले की जांच की। इस घटना की रिपोर्ट मृतकों के परिजन चंद्रभान और खुशीराम रैकवार ने ओरछा थाने में दर्ज कराई है।
आखिर कब तक जाती रहेगी निर्दोष मजदूरों की जान: कमलनाथ
घटवाहा की घटना पर दुख जताते हुए प्रदेश पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट किया है कि अवैध रूप से चलने वाली इस तरह की रेत खदानें आखिर कब बंद होगी, कब तक निर्दोष मजदूरों की जान जाती रहेगी।
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गुफा जैसा बना देते हैं टीला
बेतवा के घाट पर स्थित इस खदान में ऊपर मिट्टी थी और नीचे बालू थी। यह बालू नदी के बहाव से यहां जमा हो जाती है। इसी बालू को निकालने के लिए खनन माफिया मजदूरों को लगाकर मिट्टी के टीलों की नीचे से खुदाई करवाकर बालू निकालते हैं। मिट्टी के टीलों को गुफा नुमा बना देते हैं। ऐसी ही एक खदान से बालू निकालते समय यह हादसा हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि बसोवा घटवाहा क्षेत्र में बेतवा किनारे स्थित लोगों के निजी खेतों में लगातार अवैध रूप से मिट्टी से बालू बनाने का काम जारी है, प्रशासन को इसे तत्काल बंद कराना चाहिए, जिससे इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो सके। घटना की सूचना पर मौके पर पहुंचे तहसीलदार रोहित शर्मा व एसडीओपी पुलिस ने जानकारी की।
इकलौता बेटा था पंकज, मां का रो रोकर बुरा हाल
इस हादसे में मरने वालों में पंकज रैकवार अपने पिता वीरन कुशवाहा का इकलौता बेटा था । पंकज की माँ चिरौंजी देवी का रो- रो कर बुरा हाल है। चिरौंजी चीख- चीख कह रही थी कि उसका तो सब कुछ लुट गया। सुबह बेटा जब घर से निकला था तो मां से यह कहकर गया था दो घंटे बाद वापस आकर नहाकर आज वसंतपंचमी की पूजा करेगा, पर किसे मालूम था कि अब पंकज कभी लौटकर नहीं आएगा।
ऐसे शुद्ध की जाती है मिट्टी से निकली बालू
बेतवा नदी किनारे खेतों में बारिश के दिनों में बालू बहकर आ जाती है जो मिट्टी के टीलों के नीचे जमा हो जाती है, इसके बाद सर्दी और गर्मी के दिनों में लोग इन्हीं मिट्टी के टीलों की खुदाई करके नीचे से बालू निकाल लेते हैं। इसे ट्रैक्टर ट्रॉली में भरकर उसके ऊपर नदी पर सिंचाई बाला पंप रखकर पानी की बौछार करते हैं। इससे मिट्टी साफ हो जाती है तथा शुद्ध बालू ट्रॉली में रह जाती है जो कि तीन साढ़े तीन हजार रुपये में बिकती है।
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