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बारिश में जर्जर मकानों के गिरने का डर, निगम बेपरवाह

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झांसी। महानगर में दशकों पुरानी इमारतें हादसे का सबब बन सकती हैं। बारिश में सीलन बढ़ने से इमारतें खतरनाक हो गई हैं। अक्सर इन मकानों की दीवार के हिस्से और छत टूटकर गिरते हैं। बारिश में इमारतों के गिरने के खतरे को भांपकर लोगों में डर है। वहीं निगम ने नोटिस देने के बाद आज तक कोई कार्रवाई नहीं की। महानगर में बड़ी संख्या में ऐसे जर्जर भवन हैं, जिन्हें बने सैकड़ों साल बीत चुके हैं। पिछले साल नगर निगम ने सर्वे कराकर करीब 23 जर्जर भवनों को चिन्हित किया था।
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साथ ही मकान स्वामियों को नोटिस जारी किए थे, लेकिन आज तक इनको खाली नहीं कराया जा सका है। इन पुरानी इमारतों की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। छज्जों व छत के हिस्से भी अक्सर टूट कर गिरते हैं।
महानगर के नगरा स्थित गुुरुद्वारा मोहल्ले में दो मंजिला भवन जर्जर हाल में है। पिछले दिनों हुई बारिश में भवन की दीवार का हिस्सा गिर गया था। लोगों को इमारत के गिरने का डर सता रहा है। स्थानीय निवासी कमलेश झा बताते हैं कि इमारत में पहले नगर निगम का प्राइमरी स्कूल चलता था, लेकिन अब यह बंद है। आए दिन ईंटे गिरती हैं। भवन के पास से ही नगरा बाजार को जाने वाली सड़क से लोग गुजरते हैं। कई बार निगम को इमारत गिराने के लिए कहा गया, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
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मुकदमों की वजह से नहीं हो पाती कार्रवाई
बताया जाता है कि नगर निगम ने महानगर में जिन भवनों को जर्जर घोषित कर रखा है, उनमें अधिकांश पर किराएदारी या मालिकाना हक का मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है। यही वजह है कि इन पर कार्रवाई नहीं हो पाती।
इन क्षेत्रों में जर्जर मकान
महानगर के मानिक चौक, गणेश मढ़िया, बंगाली घाट, प्रेमनगर, नगरा, बड़ा बाजार, अलीगोल, दतिया गेट, नरिया बाजार, कसाई मंडी, कपूर टेकरी, सैंयर गेट, लक्ष्मी गेट, सागर गेट क्षेत्र में जर्जर भवन हैं।
जर्जर भवन स्वामियों को समय-समय पर नोटिस दिए जाते हैं। इनको खाली कराने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकांश भवनों के मामले कोर्ट में हैं, ऐसे में कार्रवाई नहीं हो पाती है।
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एलएन सिंह, चीफ इंजीनियर
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