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कोरोना काल में बुजुर्गों का रखें ध्यान, सबसे ज्यादा उन्हीं की गई जान

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कोरोना - फोटो : ??????
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झांसी। कोरोना वायरस के दौरान जिले में अब तक 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इन मौतों में सबसे ज्यादा बुजुर्गों की जान गई। प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से 60 या उससे अधिक उम्र के लोगों पर यह वायरस हावी होकर जान निगल गया। इसके अलावा श्वांस रोगियों और टाइप-2 डायबिटीज वाले ज्यादातर रोगी भी इस वायरस का शिकार बने हैं।
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कोरोना वायरस को झांसी में दस्तक दिए हुए चार महीने बीत चुके हैं। इन चार महीनों में जो तस्वीर निकलकर सामने आई है, उससे यह पता चलता है कि मजबूत प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को इस वायरस से ज्यादा समस्या नहीं हुई। सबसे ज्यादा बुजुर्गों पर यह वायरस कहर बनकर टूटा।
जिले में कोविड से अब तक 106 मरीजों की जान जा चुकी है। आंकड़ों पर गौर करें तो मरने वालों में 52 मरीज तो सीधे 60 या उससे अधिक उम्र के थे। इसके अलावा संक्रमण से मरने वाले 54 रोगी डायबिटीज या टाइप-2 डायबिटीज या इसके साथ किसी अन्य बीमारी से भी ग्रसित थे। इनमें कई बुजुर्ग भी शामिल हैं। मरने वालों में 24 को फेफड़े खराब और टीबी समेत श्वांस की बीमारी भी थी। इसके अलावा हार्ट, लिवर और किडनी से पीड़ित भी कुछ मरीजों की जान गई है।
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क्या होता है टाइप-2 मधुमेह
टाइप 2 मधुमेह वाले व्यक्ति में शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता है। इस स्थिति को इंसुलिन प्रतिरोध कहा जाता है। अग्नाशय या पैंक्रियाज पहले इसके लिए अतिरिक्त इंसुलिन बनाता है। हालांकि, समय के साथ यह रक्त शर्करा को सामान्य स्तर पर रखने के लिए पर्याप्त नहीं बना पाता है। इस स्थिति के लिए सटीक ट्रिगर ज्ञात नहीं है। टाइप-2 मधुमेह कारकों के संयोजन का एक परिणाम हो सकता है।
मेडिकल कॉलेज में कोरोना से जान गंवाने वाले कोरोना के ज्यादातर मरीज किसी न किसी गंभीर बीमारी से पहले से ही ग्रसित थे। सभी मरीजों की जान बचाने के लिए हर संभव इलाज किया गया। वहीं, कुछ मरीज ऐसे भी रहे, जो समय से चिकित्सालय नहीं आ पाए। कोरोना काल में लोगों को अपने घर के बुजुर्गों का बेहद ध्यान रखना चाहिए। - डॉ. एनएस सेंगर, उप प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।
कोविड से होने वाली मौतों में ज्यादातर मरीज वो होते हैं जिनका ऑक्सीजन लेवल काफी गिरा हुआ होता है। इसका मतलब ही ये है कि फेंफड़े में समस्या आ चुकी है। जब समय से उपचार नहीं मिलता है तो मरीज की मौत हो जाती है। वहीं, पहले से ही गंभीर बीमारियों से ग्रस्त व्यक्ति जब कोरोना पॉजिटिव होता है तो स्थिति और गंभीर हो जाती है। कोविड की वजह से कुछ मामलों में हार्ट अटैक का कारण बनता है। लोग इलाज में किसी तरह की कोताही न बरतें।
डॉ. प्रिंस अग्रवाल, फिजीशियन
मुख्यमंत्री तक पहुंचीं इलाज न होने की शिकायत
झांसी में कोरोना मरीजों का ग्राफ बढ़ा हुआ ही रहा है। यही कारण है कि यहां संक्रमण के कारण अधिक मौत होने से शासन तक हड़कंप मचा रहा। चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना ने मेडिकल कॉलेज के निरीक्षण के दौरान अव्यवस्थाओं पर चिंता जताई थी। मेडिकल कॉलेज समेत सरकारी अस्पतालों में उचित इलाज न मिलने की शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंच चुकी हैं। हालात इस कदर बिगड़ते गए कि शासन ने कई आला अधिकारियों को नोडल अफसर बना कर भेजा। यही नहीं, कोरोना से मौतों की संख्या कम न होने पर मुख्य सचिव को भी हालात का जायजा लेने के लिए खुद झांसी आना पड़ा।
प्रियंका गांधी ने भी झांसी में बिगड़ते हालात पर सरकार को घेरा
कोरोना काल में मौत की संख्या को लेकर झांसी हमेशा सुर्खियों में रहा। हालात बिगड़ते गए। इस मामले में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने प्रदेश सरकार को घेरा। उनका तर्क था कि कहीं अधिक आबादी और संक्रमितों की संख्या वाले आगरा व अन्य जिलों की अपेक्षा झांसी में मृत्यु दर अधिक रही। लोग इलाज के लिए तरस रहे थे। प्रियंका ने सिस्टम को पूरी तरह फेल करार दिया।
मौत से पहले मरीज ने आईसीयू से वीडियो बनाकर मांगी थी मदद
मेडिकल कॉलेज के कोविड आईसीयू और वार्डों में भर्ती मरीजों की स्थिति इस कदर खराब भी कि वे इलाज के लिए छटपटा रहे थे। कोरोना संक्रमित मऊरानीपुर के एक डिग्री कॉलेज के प्राध्यापक ने मौत से पहले वीडियो वायरल किया था। इसमें इलाज न मिलने और किसी तरह उन्हें बाहर निकालने की अपील की थी। इलाज के साथ ही चाय, पानी और खाना तक न मिलने के मामले तो आए दिन सामने आए। मरीजों ने परिजनों के माध्यम से जनप्रतिनिधियों तक शिकायत पहुंचाईं। हालात इस कदर खराब रहे कि भाजपा समेत सभी दलों के नेताओं को मेडिकल कॉलेज और जिला प्रशासन की शिकायत कमिश्नर से करनी पड़ी।
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