झांसी। सूखे की मार से खेत-खलिहान और किसान पहले से ही बेजार हैं। उसपर पिछले सप्ताह हुई बारिश व आंधी ने किसानों के जख्म पर नमक छिड़कने का काम किया है। राजस्व विभाग की जांच में तीन तहसीलों में फसलों में पांच फीसदी के नुकसान की रिपोर्ट आई है।
अतिवृष्टि व ओलावृष्टि की मार झेल चुके जिले के किसानों पर सूखे ने वज्रपात किया है। स्थिति यह है कि जिले में गेहूं की बुवाई 1.55 लाख हेक्टेअर के सापेक्ष 68 हजार हेक्टेअर में ही हो पाई है। केवल पानी की उपलब्धता वाले क्षेत्रों में ही फसलें बोई गईं हैं। जैसे-तैसे किसान जी तोड़ मेहनत कर अपनी फसलों को खड़ा कर पाए, लेकिन पिछले सप्ताह एका-एक बदले मौसम के मिजाज ने किसानों के अरमानों पर खासी ठेस पहुंचाई है। बारिश के साथ आंधी चलने से कई स्थानों पर खेतों पर खड़ी गेहूं की फसल बिछ गई थी।
किसानों के शोर मचाने पर राजस्व विभाग द्वारा इसकी जांच कराई गई। तहसील स्तर पर हुई जांच में टहरौली, गरौठा व मऊरानीपुर तहसील में फसलों में पांच-पांच फीसदी का नुकसान सामने आया है, जबकि झांसी व मोंठ तहसील में इसका प्रभाव नहीं पड़ा है।
नुकसान की नहीं हो पाएगी भरपाई
झांसी। फसलों को हुए पांच फीसदी नुकसान की सरकार भरपाई भी नहीं करेगी। 33 फीसदी से कम नुकसान पर मुआवजे का प्रावधान नहीं है। मालूम हो कि तमाम किसानों को अभी पिछले रबी व खरीफ सीजन में हुए नुकसान का मुआवजा नहीं मिल पाया है। पिछले रबी सीजन में जिले में फसलों को 3.57 अरब का नुकसान हुआ था, परंतु अब तक सवा दो अरब ही मुआवजा बांटा गया है, जबकि खरीफ में 68 करोड़ का नुकसान हुआ था। इसका मुआवजा भी अभी लंबित है।
‘तीन तहसीलों में पांच-पांच फीसदी के नुकसान की रिपोर्ट आई है। हालांकि, इसका किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाएगा। पिछले मुआवजे का वितरण लगातार जारी है।’
-उमेश नारायण पांडेय, एडीएम (वित्त एवं राजस्व)।