झांसी। पांच सालों से फाइलों में कैद ‘मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट’ के लिए शासन ने तीन करोड़ रुपये की धनराशि जारी कर दी है। निर्माण की जिम्मेदारी यूपी प्रोजेक्ट कार्पोरेशन को सौंपी गई है। प्रथम चरण में इसके लिए अधिग्रहीत की गई जमीन पर बाउंड्रीवाल का निर्माण किया जा रहा है।
वाहनों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही दुर्घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। इसका प्रमुख कारण यातायात नियमों की जानकारी का न होना तथा वाहन चलाने का सही ज्ञान न होना है। इस कमी को पूरा करने के लिए पांच साल पहले झांसी में ‘मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट’ के स्थापना की योजना बनाई गई थी। इसके लिए ग्वालियर रोड पर अंबावाय के पास परिवहन विभाग को लगभग साढ़े छह हेक्टेअर जमीन आवंटित की गई थी। लेकिन, इसके बाद मामला ठंडा हो गया था। अब एक बार फिर इंस्टीट्यूट की स्थापना की उम्मीदें परवान चढ़ने लगी हैं। शासन ने इसके लिए तीन करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की है। इसके साथ ही इसके निर्माण की दिशा में कार्यवाही तेजी से शुरू हो गई है। निर्माण जिम्मेदारी यूपी प्रोजेक्ट कार्पोरेशन को सौंपी गई है। निर्माण के पहले चरण में इंस्टीट्यूट के लिए आवंटित जमीन के चारों को चारदीवारी का निर्माण किया जा रहा है। इसके बाद भवन व अन्य आवश्यक निर्माण होंगे।
इंस्टीट्यूट में बनेगा ट्रैक
मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में पूरा ड्राइविंग ट्रैक बनाया जाएगा। इसमें घुमावदार सड़कें, तिराहे, चौराहे, स्पीड ब्रेकर, सिग्नल लाइट आदि समेत वह सभी चीजें होंगी, जिससे वाहन चालकों को सड़क पर दो चार होना पड़ता है। इसके अलावा यहां ड्राइविंग से संबंधित नये-नये प्रयोग भी किए जाएंगे।
ड्राइविंग की होगी ट्रेनिंग
इंस्टीट्यूट में लोगों को वाहन चलाना सिखाया जाएगा। इसके बाद परीक्षा होगी, जिसमें पास होने के बाद ही ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया जाएगा। बगैर इंस्टीट्यूट के प्रमाण पत्र के लाइसेंस जारी नहीं होगा। यहां ड्र्राइविंग का प्रशिक्षण परिवहन विभाग के विशेषज्ञों द्वारा दिया जाएगा।
‘यातायात नियम व वाहन चलाने की संपूर्ण जानकारी होने पर वाहन दुर्घटनाओं में भारी कमी आएगी। इसके अलावा इंस्टीट्यूट में यातायात को सुगम बनाने के लिए नये-नये अनुसंधान भी होंगे।’
- आरके सिंह, एआरटीओ