drip irigation importent for farmers
बूंद - बूंद टपक तकनीक किसानों के लिए सहायक
झांसी। कम पानी की समस्या से जूझते बुंदेलखंड क्षेत्र के किसानों के लिए बूंद- बूंद टपक तकनीक अत्यंत सहायक होगी। इस तकनीक में कम पानी में अधिक क्षेत्रफल की सिंचाई संभव होती है। सोमवार को यह बात रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में अटल जय विज्ञान व्याख्यानमाला के अंतर्गत आयोजित जल संरक्षण सप्ताह के शुभारंभ के अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व उप महानिदेशक डॉ एचपी सिंह ने कही।
विद्यार्थियों, कृषि वैज्ञानिकों एवं संकाय सदस्यों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में पानी की कमी एक बड़ी समस्या रही है। इस समस्या को सुलझाने एवं औद्यानिक व वानिकी के प्रोत्साहन के लिए कम पानी वाली विधियों का विकास अत्यंत जरूरी है। उन्होंने पानी की महत्ता एवं उपयोग के साथ साथ सिंचाई की आधुनिक तकनीकों का विस्तार से वर्णन किया। इसी संदर्भ में बूंद- बूंद टपक प्रणाली एवं बूंद-बूंद सिंचन व्यवस्था को बुंदेलखंड में अपनाए जाने पर जोर दिया। उन्होंने इस विधि को पेड़. पौधों की सिंचाई एवं उनके पोषण के लिए भी लाभकारी बताया।
कुलपति डॉ. अरविंद कुमार ने जीवन के विभिन्न आयामों के लिए आवश्यक जल के उपयोग संरक्षण एवं उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा किए जा रहे अद्वितीय प्रयासों की सराहना की। साथ ही सभी को जल संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में निदेशक शिक्षा डॉ. अनिल कुमार ने व्याख्यान माला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर डॉ. एआर शर्मा, डॉ. एस के पांडेय, डॉ. मुकेश श्रीवास्तव, डॉ. शुभा त्रिवेदी, डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव मौजूद रहे। संचालन डॉ. प्रतीक सनौडिया ने किया। आभार डॉ. एस के चतुर्वेदी ने व्यक्त किया।